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शुक्रवार, 4 जनवरी 2019

यक़ीं

जीतना है अगरहार से तू न डर,
ख़ुद पे रख तू यक़ीं, और बस कर गुज़र !

जो है लम्हा अभीइसको जी भर के जी,
ये ही लम्हा है जिसमें है सारी उमर !

फ़िर ये मौक़ा दोबारा मिले न मिले,
जब भी मौक़ा मिलेख़ुद को साबित तू कर !

अड़चनें कोई  भी न नज़र आएँगी,
गर हमेशा रहे मंज़िलों पर नज़र !

तोड़ दे सरहदेंतू भी हद से गुज़र,
सब पढ़ें ग़ौर सेबन तू ऐसी ख़बर !

क्या हुआ वो अगर तुझको ठुकरा गया,
और हैं मंज़िलेंऔर भी हैं सफ़र !

शर्तिया साथ कुछ भी नहीं जाएगा,
ज़िन्दगी कर मुसाफ़िर की तरह बसर !

शे' लिख कर के 'अल्फ़ाज़ने की दुआ,
जाऊँ हँसता हुआरोए सारा शहर !

||| अल्फ़ाज़ |||

यक़ीं= Trust, Faith, Belief, Confidence
उमर (उम्र) = Age, Life, The Span Of Life
मौक़ा= Opportunity, Chance, 
साबित= Prove
अड़चन= Obstacle 
गर= If              
सरहदें= Boundaries, Borders
हद= Limit, Boundary
ग़ौर= Deep Thought, Reflection, Deliberation
शर्तिया= Surely, Certainly, Undoubtedly
मुसाफ़िर= Traveler, Passenger
बसर= Pass, Spend, Live
शे'र= Verse, Couplet

बुधवार, 2 जनवरी 2019

बे-सल्तनत सुल्तान

लुटने की मुझको फ़िक्र क्याबे-साज़-ओ-सामान हूँ,
लोगों के दिल में घर मेराबे-सल्तनत सुल्तान हूँ !

है तू अगर इन्सान तो समझेगा मेरी बेबसी
करता हूँ मैं भी ग़लतियाँमैं भी तो बस इन्सान हूँ !

मुझको भी है दरकार हर रिश्ते से कुछ न कुछ नफ़ा
कुछ मैं भी रिश्वत-ख़ोर हूँकुछ मैं भी बेईमान हूँ !

करता नहीं मैं तब से ज़ाया एक लम्हा ज़िन्दगी.
जिस पल समझ आया कि बस एक पल का मैं मेहमान हूँ !

मुझमें दफ़्न हैं तेरी यादेंतेरी क़समेंऔर तू,
अपनी वफ़ा की लाश का मैं आप क़ब्रिस्तान हूँ !

कुरआन में भी तो नहीं अल्लाह का सारा बयाँ,
जितना ख़ुदा को जाना हैमैं उतने में हैरान हूँ !

आँखों के पानी से मैं सींचूँ किस तरह अपनी ज़मीं,
ख़ुद-कुश नहींमजबूर हूँमैं हिन्द का किसान हूँ !

कश्मीर तो मैं अब भी हूँजन्नत मगर मैं न रहा,
हर रोज़ ताज़ी क़ब्र और जलता हुआ शमशान हूँ !

'
अल्फ़ाज़मैं हूँ आईनाकहता हूँ सच मैं हू-ब-हू,
लिखता तो हूँ पेचीदगीपढ़ने में मैं आसान हूँ !

||| अल्फ़ाज़ |||

बे-साज़-ओ-सामान= Without Luggage Wherewithal (ख़ाली हाथ)
बे-सल्तनत= Without Empire (राज्यविहीनबिना राज्य का)
सुल्तान= Emperor (शासकराजा)
बेबसी= Helplessness (लाचारीविवशता)
ग़लतियाँ= Mistakes (भूलदोष)
दरकार= Required, Need (आवश्यकता)
नफ़ा= Profit, Gain (लाभ)
रिश्वत-ख़ोर= Corrupt (भ्रष्ट)
बेईमान= Cheat, Dishonest, Fraudulent, Knave
ज़ाया= Waste (व्यर्थ)
लम्हा= Moment (पलक्षण)
मेहमान= Guest (अतिथि)
दफ़्न= Buried
वफ़ा=  Fidelity, Faithfulness, Love, Loyalty (प्रेमनिष्ठा)
लाश= Dead Body, Corpse, Carcass (शव)
क़ब्रिस्तान= A Burial Ground, Cemetery, Graveyard
कुर'आन= Holy Quran, The Islamic Holy Book
बयाँ= Statement, Declaration, Description, (विवरणवर्णनउल्लेख)
हैरान= Confounded, Astonished, Perplexed, Amazed (हतप्रभचकित)
सींचना= To Irrigate/Water 
ज़मीं= Soil, Land, (भूमिधरती)
ख़ुद-कुश= Suicider, One Who Commits Suicide (स्वहंताआत्महंता)
मजबूर= Compelled, Forced, Oppressed, Constrained, (विवश)
हिन्द= India (हिन्दुस्तानभारत)
ताज़ी= Fresh, New 
क़ब्र= Grave
शमशान= Crematorium, The Place For Burning Pyres
हू-ब-हू= Exactly, Quite Perfectly (यथातथ्यसदृष्य)
पेचीदगी= Complexity (जटिलता)

गुरुवार, 18 अक्टूबर 2018

इश्क़

कभी गिर के देखोसंभल कर के देखो,
प्यार की राह पर साथ चल कर के देखो !

गर संभल के चलोगेतो तन्हा रहोगे,
इस रास्ते पे तुम भी फिसल कर के देखो !

इश्क़ सारे सवालों का इकलौता हल है,
एक दफ़ा ये पहेली भी हल कर के देखो !

इश्क़ तुमको भी तुमसे ही होने लगेगा,
मेरी आँखों से आँखें बदल कर के देखो !

फ़स्ल-ए-गुल है चमन में टहल कर के देखो,
मस्त भँवरे सा गुल पे मचल कर के देखो !

क्यूँ शमाओं की लौ पे पतंगे फ़ना हैं,
लौ किसीकी लगाओतो जलकर के देखो !

उम्र भर न सहीकुछ लम्हों को सही,
दो क़दम ही सहीसाथ चल कर के देखो !

अल्फ़ाज़ में पिरो के उनकी सारी अदाएँ, 
'अल्फ़ाज़' उनको ग़ज़ल कर के देखो !

||| अल्फ़ाज़ |||

गर= If
तन्हा= Alone, Single
इकलौता= Only
दफ़ा= Time
फ़स्ल-ए-गुल= Springtime, The Season Of Spring
चमन= Flower Garden
मस्त= Drunk, Intoxicated
गुल= Flower
शमा= Candle
लौ= Candle Flame, An Ardent Desire, Attachment 
फ़ना= Destruction
अदा= Coquetry, Gesture

गुरुवार, 7 जून 2018

उम्र-ए-दराज़ !!!

जिस्मों की तो आदत है, मिल करके बिछड़ जाना,
तुम मिलना तो ऐसे मिलना कि रूह में उतर जाना !

मुड़कर के हमने देखा, जब अपनी ज़िन्दगी को,
उम्र--दराज़ बस एक लम्हे का गुज़र जाना !

बेफ़िक्र किस क़दर था वो इश्क़ का ज़माना,
कर के तेरा तसव्वुर आठों पहर जाना !

मुझसे तेरी नज़र का पहले-पहल वो मिलना,
सदियों की गर्दिशों का लम्हें में ठहर जाना !

वो जाते-जाते तेरा मुड़कर के मुस्कुराना,
एक रूठती सी किस्मत का फ़िर से संवर जाना !

सब झूठ तो नहीं है, एक बात वो भी सच थी,
ज़िक्र--फ़िराक़ से तेरी आँखों का वो भर जाना !

देखा जो परिंदों को, तो याद आया हमको,
वो शामों का ढलना, वो लौट के घर जाना !

इस बार तो इतना भी तक़दीर में नहीं है,
हो ईद का बहाना और अपने शहर जाना !

||| फ़राज़ |||

जिस्म= Body, Material, Substance
रूह= Soul, Spirit, The Vital Principle
उम्र--दराज़= Long Life
लम्हा= Moment
बेफ़िक्र= Carefree
क़दर= Amount, Appreciation, 
ज़माना= Era
तसव्वुर= Imagination, Thought
पहर= Period Of Time, An 8th Hour Of A Day.
पहले-पहल= Initially, The First Time.
सदियों= Centuries, Centenaries
गर्दिशों= Revolution, Circulation, Misfortune
ज़िक्र--फ़िराक़= Mention/Talk of parting
परिंदों= Birds
तक़दीर= Fate, Destiny.