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गुरुवार, 18 अक्टूबर 2018

इश्क़

कभी गिर के देखोसंभल कर के देखो,
प्यार की राह पर साथ चल कर के देखो !

गर संभल के चलोगेतो तन्हा रहोगे,
इस रास्ते पे तुम भी फिसल कर के देखो !

इश्क़ सारे सवालों का इकलौता हल है,
एक दफ़ा ये पहेली भी हल कर के देखो !

इश्क़ तुमको भी तुमसे ही होने लगेगा,
मेरी आँखों से आँखें बदल कर के देखो !

फ़स्ल-ए-गुल है चमन में टहल कर के देखो,
मस्त भँवरे सा गुल पे मचल कर के देखो !

क्यूँ शमाओं की लौ पे पतंगे फ़ना हैं,
लौ किसीकी लगाओतो जलकर के देखो !

उम्र भर न सहीकुछ लम्हों को सही,
दो क़दम ही सहीसाथ चल कर के देखो !

अल्फ़ाज़ में पिरो के उनकी सारी अदाएँ, 
'अल्फ़ाज़' उनको ग़ज़ल कर के देखो !

||| अल्फ़ाज़ |||

गर= If
तन्हा= Alone, Single
इकलौता= Only
दफ़ा= Time
फ़स्ल-ए-गुल= Springtime, The Season Of Spring
चमन= Flower Garden
मस्त= Drunk, Intoxicated
गुल= Flower
शमा= Candle
लौ= Candle Flame, An Ardent Desire, Attachment 
फ़ना= Destruction
अदा= Coquetry, Gesture

रविवार, 16 सितंबर 2018

काँटों की तरह

हम ख़ुद से क्यूँ बे-ज़ार हैं काँटों की तरह,
हम ख़ुद में ही हथियार हैं काँटों की तरह !

उस गुल से वफ़ा का तक़ाज़ा नहीं करते,
हम जिसके पहरेदार हैं काँटों की तरह !

फूलों की तरह डर नहीं मुरझाने का हमें,
हम तो सदाबहार हैं काँटों की तरह !

शाख़ों से कोई हमको जुदा कर नहीं सकता,
ता-उम्र वफ़ादार हैं काँटों की तरह !

रंग-ओ-बू से गुल की हमको कोई नहीं ग़रज़,
हम बे-सरोकार हैं काँटों की तरह !

गुलशन की रिवायत से शिकायत नहीं हमें,
मुक़द्दर के हम शिकार हैं काँटों की तरह !

फूलों की तरह बिकते नहीं हम बाज़ार में,
-ज़िद-ओ-बा-वक़ार हैं काँटों की तरह !

चुभते हैं तो चुभेंगे ता-ज़िन्दगी तुम्हें,
हम साहिब-ए-किरदार हैं काँटों की तरह !

कीमत मेरे हुनर कीन दे सका ज़माना,
‘फ़राज़’ बे-ख़रीदार हैं काँटों की तरह !
           
||| फ़राज़ |||

बेज़ार= To Be Sick Of
हथियार= Weapon, Arms
गुल= Flower
वफ़ा= Fidelity, Faithfulness
तक़ाज़ा= Demand, Urge
पहरेदार= Watchman,  Guard
शाख़= Branch, Bough,
ता-उम्र= Lifelong
वफ़ादारFaithful, Loyal
सदाबहार= Evergreen
रंग-ओ-बूColor And Fragrance
ग़रज़Intention, Object
बे-सरोकार = Unconcerned
गुलशन= Flower Garden
रिवायत= Tradition, Custom
शिकायत= Complaint
मुक़द्दर= Destiny
शिकार= Victim
बाज़ार= Market
बज़िद= Persistent, Obstinate
बा-वक़ार= Honored, Prestigious, Reputed
ता-ज़िन्दगी= Lifelong
साहिब-ए-किरदार= Man Of Character
ज़माना= The World, Era, Time
बे-ख़रीदार= Without Customer

मंगलवार, 11 अप्रैल 2017

फ़रायज़ !!!

मेरा किरदार फ़रायज़ के मुताबिक़ है,
मैं हूँ वो ख़ार जो मुहाफ़िज़-ए-गुल है !

||| फ़राज़ |||

किरदार= Character
फ़रायज़= Duties
मुताबिक़= According
ख़ार= कांटा = Thorn
मुहाफ़िज़-ए-गुल= Protector of the rose. 

My character is according to my duties.
I’m the thorn who protects the rose.