हम ख़ुद से क्यूँ बे-ज़ार हैं काँटों की तरह,
हम ख़ुद में ही हथियार हैं काँटों की तरह !
उस गुल से वफ़ा का तक़ाज़ा नहीं करते,
हम जिसके पहरेदार हैं काँटों की तरह !
फूलों की तरह डर नहीं मुरझाने का हमें,
हम तो सदाबहार हैं काँटों की तरह !
शाख़ों से कोई हमको जुदा कर नहीं सकता,
ता-उम्र वफ़ादार हैं काँटों की तरह !
रंग-ओ-बू से गुल की हमको कोई नहीं ग़रज़,
हम बे-सरोकार हैं काँटों की तरह !
गुलशन की रिवायत से शिकायत नहीं हमें,
मुक़द्दर के हम शिकार हैं काँटों की तरह !
फूलों की तरह बिकते नहीं हम बाज़ार में,
ब-ज़िद-ओ-बा-वक़ार हैं काँटों की तरह !
चुभते हैं तो चुभेंगे ता-ज़िन्दगी तुम्हें,
हम साहिब-ए-किरदार हैं काँटों की तरह !
कीमत मेरे हुनर की, न दे सका ज़माना,
‘फ़राज़’ बे-ख़रीदार हैं काँटों की तरह !
||| फ़राज़ |||
बेज़ार= To Be Sick Of
हथियार=
Weapon, Arms
गुल= Flower
वफ़ा= Fidelity, Faithfulness
तक़ाज़ा= Demand, Urge
पहरेदार=
Watchman, Guard
शाख़= Branch, Bough,
ता-उम्र=
Lifelong
वफ़ादार= Faithful, Loyal
सदाबहार=
Evergreen
रंग-ओ-बू= Color And Fragrance
ग़रज़= Intention, Object
बे-सरोकार = Unconcerned
गुलशन=
Flower Garden
रिवायत=
Tradition, Custom
शिकायत=
Complaint
मुक़द्दर=
Destiny
शिकार= Victim
बाज़ार= Market
बज़िद= Persistent, Obstinate
बा-वक़ार= Honored, Prestigious, Reputed
ता-ज़िन्दगी=
Lifelong
साहिब-ए-किरदार= Man
Of Character
ज़माना= The
World, Era, Time
बे-ख़रीदार=
Without Customer