अजब रिवायतें रखते हैं तेरे शहरवाले,
ज़हर सस्ता और महंगी दवा रखते हैं!
ज़ाहिराना तो रखते हैं अदब-ओ-लिहाज़,
रंजिशें दिल में, और होंठों पे दुआ रखते हैं!
इल्ज़ामदराज़ियाँ करते हैं वो पीठ पीछे,
सामने वो लोग मीठी सी ज़बां रखते हैं!
तेरे नाम से आवाज़ देते हैं मुझको अक्सर,
कुछ लोग मेरे ज़ख्मों को हरा रखते हैं!
अब तो तू भी हो गया है उनके ही जैसा,
लोग नफ़रत अब मुझसे बे-वजह रखते हैं!
|||फ़राज़|||
जब भी गुज़रता है तेरी गली से ''फ़राज़,
लोग तेरी खिड़की पर निगाह रखते हैं!
|||फ़राज़|||
अजब= strange
रिवायत= traditions
ज़ाहिरन= apparently, overtly
अदब-ओ-लिहाज़= respect, modesty
रिवायत= traditions
ज़ाहिरन= apparently, overtly
अदब-ओ-लिहाज़= respect, modesty
रंजिशें
इल्ज़ामदराज़ियाँ
ज़बां
बे-वजह
निगाह
बे-वजह
निगाह