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रविवार, 28 जुलाई 2019

कौन करे


फ़िर जान की आफ़त कौन करे,
फ़िर उनसे मोहब्बत कौन करे !

दिल टूट गया तो टूट गया,
फ़िर इसकी मरम्मत कौन करे !

ये नींद खुली है मुश्किल से,
फ़िर ख़्वाब की हसरत कौन करे !

दोज़ख़ में अगर तुम मिल जाओ,
तो जन्नत जन्नत कौन करे !

बस ज़ुल्म ही आता है उसको,
बेदर्द से मिन्नत कौन करे !

वो पत्थरपत्थर ही निकला,
अब उसकी इबादत कौन करे !

एकमुश्त सभी को मौत मिली,
जीने में किफ़ायत कौन करे !

ये दौर-ए-ज़माना जाहिल है,
'अल्फ़ाज़नसीहत कौन करे !

||| अल्फाज़ |||

आफ़त = Calamity, Disaster, विपदाकष्ट,
मरम्मत = Mend, Repair, जीर्णोद्धार
ख़्वाब = Dream, सपना, स्वप्न
हसरत = Desire, चाह
दोज़ख़ = Hell, नर्क
जन्नत = Heaven, Paradise, स्वर्ग
ज़ुल्म= Oppression, Injustice, उत्पीड़न, अत्याचार
बेदर्द= Cruel, Heartless, क्रूर, निर्दयी
मिन्नत = Entreaty, Obligation, विनती, अनुनय
इबादत = Prayer, Adoration, आराधना, भक्ति
एकमुश्त = Lump Sum.
किफ़ायत = Economy, Parsimony, अल्प व्यय,
दौर-ए-ज़माना = Age, Era,  युग, काल
जाहिल =  Illiterate, अज्ञानी
नसीहत = Advice, Counsel, सदुपदेश, अच्छी सलाह

बुधवार, 24 जुलाई 2019

किसको है !

अब हिज्र की हैबत किसको है,
अब उनसे मोहब्बत किसको है !

अब लोग ज़रा जल्दी में है,
जीने की फ़ुर्सत किसको है !

आमाल ज़रा सबके देखो,
दोज़ख़ से दहशत किसको है !

गर मिले हमें तो जाएज़ है,
रिश्वत से अज़ीयत किसको है !

गर फिसले ज़बाँतो बात अलग,
सच कहने की आदत किसको है !

दुनिया के
 मसाइल क्या कम हैं,
मज़हब की ज़रुरत किसको है  !

'अल्फ़ाज़जो न हो मौत का डर,
तो रब की ज़रुरत किसको है !

||| अल्फ़ाज़ |||

हिज्र = Separation From Beloved, जुदाईविरह
हैबत = Fright, Panic, भयडर,
फ़ुर्सत = Leisure, Rest, आराम 
आमाल = Deeds, Conducts, कर्मव्यवहार
दोज़ख़ = Hell, नर्क
दहशत = Terror, Fear,आतंक 
गर = If, यदि
जाएज़ = Legal, Right, उचितवैध
रिश्वत = Bribe, घूस
अज़ीयत = Trouble, Suffering, कष्ट
ज़बाँ = Tongue, जिह्वाजीभ
मसाइल = Problems, Issues, समस्याएँमुद्दे
मज़हब = Religion, धर्म
रब = God, अल्लाह, ईश्वर

बुधवार, 13 फ़रवरी 2019

तारीख़

इश्क़ के फ़ैसले होंगे,
आज मोहब्बत की तारीख़ है !

||| अल्फ़ाज़ |||

फ़ैसले (Faisley)= Verdict, Judgment, Decision, निर्णय
तारीख़ (Tareekh)= Hearing In Court, Date, तिथि

शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2019

मोहब्बत

ये जो उनसे ज़रा सी शिकायत हुई,
देखिये तो सही क्या मोहब्बत हुई !

चोट प्यारी सी है, दर्द मीठा सा है,
दिल को भी एक अजब सी अज़ीयत हुई ! 

एक तेरे सिवा सूझता कुछ नहीं,
अब ज़हन की भी दिल जैसी हालत हुई !

आज मेरे लिए मुस्कुरा वो दिए,
ज़िन्दगी ख़ुशनुमा, पुर-मसर्रत हुई !

दिल में महफ़िल है, त्यौहार और जश्न है,
इश्क़ इतवार की जैसे फ़ुर्सत हुई !

हर तसव्वुर तेरा है अदब से किया,
इस तरह आशिक़ी भी इबादत हुई !

उनके आने से 'अल्फ़ाज़' की ज़िन्दगी,
मेहरबान और ख़ूबसूरत हुई !

||| अल्फ़ाज़ |||

शिकायत = Complaint
अजब = Strange, Wonderful, 
अज़ीयत = Trouble, Suffering, 
ज़हन = Mind, Brain, 
ख़ुशनुमा = Pleasant, Beautiful, 
पुरमसर्रत = Joyous, Full Of Happiness
महफ़िल = Party, The Congregation
त्यौहार = Festival
जश्न = A Feast, A Jubilee, Celebration
फ़ुर्सत = Leisure, Freedom, Rest
तसव्वुर = Imagination, Contemplation,
अदब = Respect, Courtesy
आशिक़ी = Love, State Of Being In Love Courtship
तसव्वुर = Imagination, Contemplation,
अदब = Respect, Courtesy
आशिक़ी = Love, State Of Being In Love Courtship
इबादत = Prayer, Worship
मेहरबान = Benign, Kind,

सोमवार, 10 दिसंबर 2018

ज़िन्दगी

ख़ुद अपने हर सवाल का जवाब ज़िन्दगी,
समझो तो हक़ीक़त है वरना ख़्वाब ज़िन्दगी !

दुश्वारियाँ हैं लेकिनहै फ़िर भी ख़ूबसूरत,
काँटों के दरमियान है गुलाब ज़िन्दगी !

जैसी हुई हिदायतवैसी गुज़ारी हमने ,
न जाने है गुनाह या सवाब ज़िन्दगी !

अपने ही फ़ैसलों काहासिल है हर नतीजा,
अपने ही हर किये का हिसाब ज़िन्दगी !

उतरे हैं बारी-बारी हर चेहरे से मुखौटे,
बुरे वक़्त में हटाती है नक़ाब ज़िन्दगी !

ख़ुद से जो की मोहब्बततब पाई मैंने राहत,
दिल मुस्कुरा के बोलाआदाब ज़िन्दगी !

फ़ुर्सत कभी मिले तोपन्नों को मेरे पलटो,
'अल्फ़ाज़है खुली हुई किताब ज़िन्दगी !

||| अल्फ़ाज़ |||

हक़ीक़त = Reality, Truth
दुश्वारियाँ = Difficulties 
दरमियान = Middle, Between
हिदायत = Leading One Into The Right Way (In A Literal Or Religious Sense); Guidance, Direction
सवाब = Recompense, Compensation, Reward (Especially, Of Obedience To God)
फ़ैसला = Decision
नतीजा = Result, Consequence, Inference, Conclusion
हिसाब = Computation, Calculation, Account
बारी बारी = One By One
मुखौटा = Mask
नक़ाब = Fem, Veil
मोहब्बत = Friendship, Love, Affection, Amour
राहत = Comfort, Ease
आदाब =  Salutations
फ़ुर्सत = Leisure, Freedom, Rest

रविवार, 28 अक्टूबर 2018

हसरत

पाँवों को फैलाने की फ़ितरत का क्या करूँ,
चादर का नहीं दोषमैं हसरत का क्या करूँ !

ऐ काश भुला पाता तुम्हे मैं भी मुकम्मल,
शिकवे तो भूल जाऊँमोहब्बत का क्या करूँ !

तुमको है यही ज़िद कि भुला दूँ तुम्हें मैं भी,
ख़्वाहिश तो छोड़ दूँ मैं आदत का क्या करूँ !

ज़िद छोड़ दूँ तेरी मगर मसअला है कुछ अलग,
हसरत तो दबा लूँमैं ज़रुरत का क्या करूँ !

अच्छी तरह पहचानता हूँ मैं तेरे मुखौटे,
सीरत तेरी बुरी है तो सूरत का क्या करूँ !

हर इल्ज़ाम गवारा था तेरे इश्क़ में हमको,
तू ही नहीं तो मैं तेरी तोहमत का क्या करूँ !

रुक जायेगा तूने अगर सोचा कभी ऐसा,
मेहनत में न कमी थी मैं क़िस्मत का क्या करूँ !

'अल्फ़ाज़मैं क्या पाउँगा हो कर के जन्नती,
जब यार हों  दोज़ख़ में तो जन्नत का क्या करूँ !

||| अल्फ़ाज़ |||

फ़ितरत= Nature
दोष= Fault, Sin
हसरत= Unfulfilled Desire
मुकम्मल= Complete
शिक़वा= Complaint, Reproach
ख़्वाहिश= Wish, Inclination
मसअला= Problem, Matter,
मुखौटे= Mask
सीरत= Quality, Disposition, Character
इल्ज़ाम= Accusation, Charge, Blame
गवारा= Bearable, Tolerable
तोहमत= Allegation, Accuse
जन्नतीDweller In Paradise
दोज़ख़= Hell