ख़ुद
अपने हर सवाल का जवाब ज़िन्दगी,
समझो
तो हक़ीक़त है वरना ख़्वाब ज़िन्दगी !
दुश्वारियाँ हैं लेकिन, है फ़िर भी ख़ूबसूरत,
काँटों
के दरमियान है गुलाब ज़िन्दगी !
जैसी
हुई हिदायत, वैसी गुज़ारी हमने ,
न
जाने है गुनाह या सवाब ज़िन्दगी !
अपने
ही फ़ैसलों का, हासिल है हर नतीजा,
अपने
ही हर किये का हिसाब ज़िन्दगी !
उतरे
हैं बारी-बारी हर चेहरे से मुखौटे,
बुरे
वक़्त में हटाती है नक़ाब ज़िन्दगी !
ख़ुद
से जो की मोहब्बत, तब पाई मैंने राहत,
दिल
मुस्कुरा के बोला, आदाब ज़िन्दगी !
फ़ुर्सत कभी मिले तो, पन्नों को मेरे पलटो,
'अल्फ़ाज़' है खुली हुई किताब ज़िन्दगी !
||| अल्फ़ाज़ |||
हक़ीक़त
= Reality, Truth
दुश्वारियाँ
= Difficulties
दरमियान
= Middle, Between
हिदायत
= Leading One Into The Right Way
(In A Literal Or Religious Sense); Guidance, Direction
सवाब
= Recompense, Compensation,
Reward (Especially, Of Obedience To God)
फ़ैसला
= Decision
नतीजा
= Result, Consequence, Inference,
Conclusion
हिसाब
= Computation, Calculation,
Account
बारी
बारी = One By One
मुखौटा
= Mask
नक़ाब
= Fem, Veil
मोहब्बत
= Friendship,
Love, Affection, Amour
राहत
= Comfort, Ease
आदाब
= Salutations
फ़ुर्सत = Leisure, Freedom, Rest
फ़ुर्सत = Leisure, Freedom, Rest