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मंगलवार, 23 जुलाई 2019

अमल

ज़िन्दगी की पहेली यूँ हल कीजिये,
जो ज़रूरी है उसपे अमल कीजिये !

||| अल्फ़ाज़ |||

अमल = Act, Process, कार्यकर्म,

रविवार, 25 फ़रवरी 2018

तस्सव्वुर !!!

कोई अमल  काफ़िराना कर बैठूं,
अजब सी मयकशी है उन निगाहों में !

झपक दे वो पलकें तो वक़्त रुक जाये,
सारा आलम सिमट आये मेरी पनाहों में !

तेरे तस्सव्वुर में मेरे सजदे क़ज़ा होते हैं,
मुब्तला करता है तू मुझको गुनाहों में !

तेरा एहसास जैसे कोई नेकी का सिला,
तेरा दीदार जैसे असर हो मेरी दुआओं में !

तेरी तलाश, तू ही सफ़रमंज़िल तू ही,
साथ चलता है तेरा साया मेरी राहों में !

इश्क़ इबादत हो या न हो 'फ़राज़',
सवाब रखा है ख़ुदा ने वफ़ाओं में !

||| फ़राज़ |||

अमल= Act
काफ़िराना= Infidelity, Idolatry
अजब= Strange
मयकशी= Booze
निगाह= Eye
आलम= Universe
पनाह= Protection, Shelter, Shade
तस्सव्वुर= Imagination
सजदा= bowing in prayer so as to touch the ground with the forehead
क़ज़ा= Lapse, 
मुब्तला= Afflicted, Distressed.
गुनाह= Sin, Crime.
एहसास= Feeling
नेकी= Goodness, Piety
सिला= Reward
दीदार= Appearance, Sight
दुआ= Prayer, Wish
तलाश= Search
सफ़र= Journey
मंज़िल= Destination
साया= Shadow, Shade
इश्क़= Love
इबादत= Prayer, Adoration
सवाब= Reward of good deeds.
ख़ुदा= God.

वफ़ा= Fidelity, Fulfilling of promises.

बुधवार, 6 सितंबर 2017

दिल के फ़रेब

रूबरू ख़ुद से मैं जिस पल हो गया,
एक पहेली सा था, मैं हल हो गया !

दिल के हर फ़रेब की किताबत की है,
कीमियागरी अब मेरा शग़ल हो गया !

जब भी तेरा नाम मेरी ज़ुबान पर आया,
मुख़ालिफ़ मेरे ये सारा शहर हो गया !

कुछ ठिकाने फ़िर कभी न आबाद हुए,
मेरे शहर से जब मैं शहर-बदर हो गया !

आना तो न था मुझे वापस तेरे दर पर ,
फ़क़त आदतन मुझसे ये अमल हो गया !

बिखरा सा था तू अब तलक ख़यालों में,
मैंने समेटा लिया तो तू ग़ज़ल हो गया !

|||फ़राज़|||

फ़रेब= Deception, Deceit.
किताबत= Correspondence.
कीमियागरी= Alchemy.
शग़ल= Hobby.
मुख़ालिफ़= Opposite, Enemy.
शहर-बदर= Outcasted, Exiled.
फ़क़त= merely, simply, only.
आदतन= Habitually.
अमल= Act.