FAQAT लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
FAQAT लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, 6 सितंबर 2017

दिल के फ़रेब

रूबरू ख़ुद से मैं जिस पल हो गया,
एक पहेली सा था, मैं हल हो गया !

दिल के हर फ़रेब की किताबत की है,
कीमियागरी अब मेरा शग़ल हो गया !

जब भी तेरा नाम मेरी ज़ुबान पर आया,
मुख़ालिफ़ मेरे ये सारा शहर हो गया !

कुछ ठिकाने फ़िर कभी न आबाद हुए,
मेरे शहर से जब मैं शहर-बदर हो गया !

आना तो न था मुझे वापस तेरे दर पर ,
फ़क़त आदतन मुझसे ये अमल हो गया !

बिखरा सा था तू अब तलक ख़यालों में,
मैंने समेटा लिया तो तू ग़ज़ल हो गया !

|||फ़राज़|||

फ़रेब= Deception, Deceit.
किताबत= Correspondence.
कीमियागरी= Alchemy.
शग़ल= Hobby.
मुख़ालिफ़= Opposite, Enemy.
शहर-बदर= Outcasted, Exiled.
फ़क़त= merely, simply, only.
आदतन= Habitually.
अमल= Act.

मंगलवार, 25 अप्रैल 2017

अँधेरे !!!

मेहरबानियाँ उजालों की है जिस्म की रंगत,
अँधेरे कभी रंगतों पर रिआ'यत नहीं करते !

देखते सबकुछ हैं मगर ख़ामोश रहते हैं,
अँधेरे गुनाहों की शिक़ायत नहीं करते !

अस्ल किरदार होते हैं अंधेरों में वो लोग अक्सर,
उजालों में जो लोग कभी शरारत नहीं करते !

वो क्या समझेंगे उजालों के हुस्न को,
जो लोग अंधेरों से कभी सोहबत नहीं करते !

फ़क़त चाँद की तलब में हर शब् चले आते हैं,
ये अँधेरे किसी शम्स की हसरत नहीं करते !

लगता है अँधेरा कोई उनके भी दिल में है,
उजालों से आजकल वो मिल्लत नहीं करते !

||| फ़राज़ |||



मेहरबानियाँ= Kindness
रंगत = colour.
रिआ'यत= Concession
शिक़ायत= Complaint
अस्ल= Real
किरदार= Character
शरारत= Mischief
हुस्न= Beauty
सोहबत= Company, Association 
फ़क़त= Only, Merely
तलब= Desire, Urge
शब्= Night
शम्स= The Sun
हसरत= Desire
मिल्लत= Meeting