कोई अमल न काफ़िराना कर बैठूं,
अजब सी मयकशी है उन निगाहों में !
झपक दे वो पलकें तो वक़्त रुक जाये,
सारा आलम सिमट आये
मेरी पनाहों में !
तेरे तस्सव्वुर में मेरे सजदे क़ज़ा होते हैं,
मुब्तला करता है तू
मुझको गुनाहों में !
तेरा एहसास जैसे कोई नेकी का सिला,
तेरा दीदार जैसे असर हो
मेरी दुआओं में !
तेरी तलाश, तू ही सफ़र, मंज़िल तू ही,
साथ चलता है तेरा साया मेरी राहों में !
इश्क़ इबादत हो या न हो 'फ़राज़',
सवाब रखा है ख़ुदा ने वफ़ाओं में !
||| फ़राज़ |||
अमल= Act
काफ़िराना=
Infidelity, Idolatry
अजब= Strange
मयकशी=
Booze
निगाह=
Eye
आलम= Universe
पनाह= Protection, Shelter,
Shade
तस्सव्वुर=
Imagination
सजदा= bowing in prayer so as to touch the ground with the
forehead
क़ज़ा= Lapse,
मुब्तला=
Afflicted, Distressed.
गुनाह=
Sin, Crime.
एहसास=
Feeling
नेकी= Goodness, Piety
सिला= Reward
दीदार=
Appearance, Sight
दुआ= Prayer, Wish
तलाश= Search
सफ़र= Journey
मंज़िल=
Destination
साया= Shadow, Shade
इश्क़= Love
इबादत=
Prayer, Adoration
सवाब= Reward of good deeds.
ख़ुदा= God.
वफ़ा= Fidelity, Fulfilling of
promises.