पत्थर भी तराशा जाए, तो ख़ुदा हो सकता है !
तू तो इन्सान है, सोच तू क्या से क्या हो सकता है !
तू तो इन्सान है, सोच तू क्या से क्या हो सकता है !
बस यही सोच कर मैंने तुझे माफ़ कर दिया,
तू भी इंसान है, तुझसे भी गुनाह हो सकता है !
इस सवाल का जवाब तो मुझे बारहा
मिल ही जाता है,
कि अब इससे भी बुरा और क्या हो सकता है !
सुना है कि ख़ुदा जो करता है, बेहतर करता है,
सब्र कर, इस नुक़सान में भी नफ़ा हो सकता है !
है क्या वजह जिसने मुझसे शायर बना डाला,
मत पूछ कि मेरा ज़ख़्म हरा हो सकता है !
ये डर तो था मुझे कि बिछड़ जायेंगे एक दिन,
ये गुमान भी न था कि तू बेवफ़ा हो सकता है !
दिल लगाइये तो ज़रूर मगर लुटाइये नहीं,
जनाब, दिल के सौदे
में ख़सारा हो सकता है !
अपने हालात पर जो तुझको सब्र आ जाए,
तो मुख़्तसर असासे में भी गुज़ारा हो सकता है !
ये और बात है कि वो तग़ाफ़ुल कर देगा,
कह लेने से मेरा दिल तो हल्का हो सकता है !
ठोकरों से सीखा है ‘फ़राज़’ ने संभलने का हुनर,
राह का हर एक पत्थर रहनुमा हो सकता है !
||| फ़राज़ |||
तराशा= Chiseled
गुनाह= Fault, Crime, Sin
बारहा= Many Times
बेहतर= Better
सब्र= Patience
नुक़सान= Loss
नफ़ा= Profit
वजह= Reason, Cause
शायर= Poet
ज़ख़्म= Wound
गुमान= Doubt, Suspicion,
Distrust,
बेवफ़ा= Unfaithful, Treacherous
ख़सारा= Loss
मुख़्तसर= Concise, Short, Abbreviated
असासे= Household Property, Belonging
गुज़ारा= Live Off, Livelihood
तग़ाफ़ुल= Neglect, Negligence.
हुनर= Talent, Art, Skill
रहनुमा= Guide