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गुरुवार, 9 अगस्त 2018

इतना टूटा नहीं हूँ कि बिखर जाऊँगा,
ज़रा वक़्त दे मुझेमैं निखर जाऊँगा !

माना कि बहुत दूर मैं निकल आया हूँ,
यक़ीन है एक दिन लौट के घर जाऊँगा !

ये तो डर कि एक दिन था बिछड़ना होगा,
क्या ख़बर थी कि तेरे दिल से उतर जाऊँगा !

मयकदे में तो लोग ख़ुद को भूल जाते हैं,
तुझे भुला न सका तो किधर जाऊँगा !

जब बुलाओगे तो दौड़ा चला आऊँगा,
मैं कोई वक़्त नहीं हूँ जो गुज़र जाऊँगा !

सुना है की वहां रहमतें बरसती हैं,
जाने कब मैं मुस्तफ़ा के शहर जाऊँगा !

एक उम्र से 'फ़राज़तूफ़ाँ में पला है,
हवाएँ जब ख़िलाफ़ होंगीसंवर जाऊँगा !

||| फ़राज़ |||

ख़बर= Knowledge, Information
मयकदे= Bar, Tavern
रहमतें= Divine Mercy, Blessing
मुस्तफ़ा= One Of The Names Of The Prophet Muhammad (S.A.W)
तूफ़ाँ= A Storm Of Wind And Rain, Tempest, Deluge, Flood
ख़िलाफ़= Against

मंगलवार, 24 जुलाई 2018

ख़ता !

कुछ ख़ताएँ न की तो फ़िर मज़ा क्या है,
फ़रिश्ता होने में इतना भी नफ़ा क्या है !

मामला दिल का है तो फ़र्क़ पड़ता क्या है,
कि सही-ग़लत और भला-बुरा क्या है !

तेरी बाहों से जो मुझे रिहा कर दे,
ऐसी आज़ादी में भला नफ़ा क्या है !

तेरी जफ़ा को भी सलीक़े से बयां करता हूँ,
वफ़ा-दारी की इससे बेहतर सज़ा क्या है !

याद कर करके तुझको मैं ये सोचता हूँ,
कि तुझे भूल जाने का तरीका क्या है !

तेरी याद को मेरे दिल से भुला न सके,
उस मयकदे में 'फ़राज़' नशा क्या है !

ख़ता= Fault, Mistake
फ़रिश्ता= Angel
नफ़ा= Profit
मामला= Matter
फ़र्क़= Difference
रिहा= Release
जफ़ा= Injustice, The Tyranny Of Beloved
सलीक़ा= Good Manners, Discreet Of Good Disposition
बयां= Statement, Declaration, Description, Assertion
वफ़ा-दारी= Constancy, Fidelity
बेहतर= Better
सज़ा= Punishment
मयकदा= Bar, Tavern.

मंगलवार, 3 जुलाई 2018

तसल्ली !!!

महज़ कांटे ही महफ़ूज़ हैं इस ज़माने में,
फूल तो मसल जाते हैं राहों को सजाने में !

कभी अपनों की शिकायत ग़ैरों से कीजिये,
कोई पीछे न रहेगा आग लगाने में !

इतना महँगा भी नहीं है तसल्ली देना,
इतना ख़र्चा भी नहीं है मुस्कुराने में !

कोई अपना रूठ जाए तो उसे मना लेना,
एक उम्र लगती है रिश्तों को बनाने में !

नफ़रत अगर चाहिए तो मुफ़्त मिलेगी,
मगर प्यार ख़र्च होता है प्यार कमाने में !

इक़रार न सही तो इंकार ही सही,
कुछ तो हासिल होगा दिल आज़माने में !

तुझे याद तो महज़ इसलिए करता हूँ,
मुझे आराम मिलता है दिल जलाने में !

तेरी हसरत तो करता हूँज़िद नहीं करता,
कोई बुराई तो नहीं तुझे इस तरह चाहने में !

गुनाह तो तब है कि जब मयकशी की जाये,
कोई गुनाह नहीं 'फ़राज़मयकदे जाने में !

||| फ़राज़ |||

महज़ = Merely, Only
महफ़ूज़ = Safe
ज़माना = World, Era
शिकायत = Complaint, Lamentation
ग़ैर = Stranger, Rival, Outsider 
तसल्ली = Solace, Consolation, Comfort
ख़र्चा = Expense
नफ़रत = Hate
इक़रार = Consent, Pledge
इंकार = Denial, Refusal
हासिल = Gain, Result
आज़माना = Try, Test
हसरत = Desire
ज़िद = Insistence
गुनाह = Sin, Crime, Fault
मयकशी = Boozing, To Drink
मयकदे= Bar, Tavern

मंगलवार, 28 नवंबर 2017

मशवरा !!!

मयकशी नहीं सबब मयकदे में आने का,
मैं तो एक रिंद से इस्लाह लेने आया हूँ !
अब उसकी मर्ज़ी है कि मर्ज़ दे या शिफ़ा,
मैं तो दर्द-ए-दिल की दवा लेने आया हूँ !

अपने क़ातिल को ही हाकिम है बनाया मैंने,
उससे ही उसके जुर्म की सज़ा लेने आया हूँ !
अब तू कहे तो जियूं, या तू कहे तो मर जाऊं,
अपने अंजाम का तुझसे मशवरा लेने आया हूँ !

मुझे पहचान कर फ़िर से नज़रअंदाज़ कर दे,
गाहक पुराना हूँ, मैं दर्द नया लेने आया हूँ !
राहतें रास नहीं आतीं हैं अब मेरे दिल को,
तू फ़िर बेरुख़ी कर, मैं हादसा लेने आया हूँ !

यूँ न जाऊँगा मैं आज मस्जिद को छोड़कर,
आज सवाब नहीं, आज मैं ख़ुदा लेने आया हूँ !
ये अश’आर तो बस बहाना है मुलाक़ात का,
मैं तो बस अपनों की दुआ लेने आया हूँ !

|||फ़राज़|||

मयकशी= Boozing.
मयकदा= Bar, Tavern.
रिंद= Drunkard.
इस्लाह= Correction, Revision, Reform.
मर्ज़ी= Choice, Consent.
मर्ज़= Sickness, Disease, Infirmity.
शिफ़ा= Healing, Cure, Recovery.
दर्द-ए-दिल= Heart's Grief, Heartache, Sorrow, Anguish.
क़ातिल= Murderer, Killer, Assasin.
हाकिम= Judge, Ruler, Master. 
मशवरा= Counsel, Consultation.
नज़रअंदाज़= Ignore, Overlook
गाहक= Customer, 
राहत= Comfort, Ease, Rest.
रास= Be suitable.
बेरुख़ी= Ignorance
हादसा= Calamity.
सवाब= Reward of good deeds
अश’आर= Couplet.

रविवार, 19 नवंबर 2017

अगरचे!!!

सरगुज़िश्त अपनी पढ़नी थी,
रु-ब-रु ख़ुद के मैंने आईना रखा !
हर पल में है मैंने जीना सीखा,
हौसला मैंने इस तरह रखा !

पड़ोस भी घर सा लगता है,
दरीचा उधर का भी खुला रखा !
ग़रज़ सवाब की रही हो या न हो,
दरवाज़े पर अपने उजाला रखा !

कलमे की शहादत भी मैं देता हूँ,
मयकदों से भी मैंने सिलसिला रखा !
राब्ता मस्जिद से यूँ तो कम है अपना,
अगरचे दिल में हमेशा ख़ुदा रखा !

किसीकी फ़िक्र करने लगा हूँ मैं,
ये राज़ उस ही से है मैंने छुपा रखा !
अजब कारोबार है इश्क़ का 'फ़राज़',
जिसमें हार जाने में ही नफ़ा रखा !

|||फ़राज़|||

सरगुज़िश्त= biography
रु-ब-रु= In front of, Face to face.
हौसला= Courage
दरीचा= Window.
ग़रज़= Intention, Purpose.
सवाब= Reward of good deeds.
कलमा= The Muslim confession of faith.
शहादत= Testimony, Witness.
मयकदा= Bar, Tavern.
राब्ता= Contact
अगरचे= Although.
फ़िक्र= Concern
अजब= Amazing, Wonderful.
कारोबार= Business, Trade, Affair.
नफ़ा= Profit.

मंगलवार, 14 नवंबर 2017

मोहब्बत!!!

दिल बता तूने फ़िर ये कैसी जुरअत की है,
तसव्वुर-ए-यार से ये कैसी मोहब्बत की है !

दिल तेरा बचपना भी जाने कब जाएगा,
तूने फ़िर चाँद को छूने की हसरत की है !

तरफ़दारी दिल-ए-नादां की हर बार मैं करता हूँ,
ज़हन ने तो हर बार दिल की मुख़ालिफ़त की है !

न मय, न मयकदा, न साक़ी, नशा फ़िर भी है,
अजब सी मयकशी मैंने बाद मुद्दत की है !

एक तस्कीन सी वाबस्ता है उन निगाहों में,
वो निगाह प्यार की है, वो निगाह रहमत की है !

तेरे अहसास में मुझे मस्जिद सा सुकून मिलता है,
तुझको जाना है तो मैंने ख़ुदा की भी इबादत की है !

मेरी भटकती रातों में सितारा तू सुबह का है,
एक सफ़र नेक सा तू, एक राह तू जन्नत की है !

तू दोपहर में साया, तू शाम की है लाली,
ताज़गी तू सुबह की, तू रात फ़ुर्सत की है !

अब तरन्नुम सा मुझे हर ख़याल लगता है,
मेरे ख़यालों ने तेरे ख़याल से उल्फ़त की है !

इसे ग़ज़ल न समझ ओ मुझे पढ़ने वाले,
हाल-ए-दिल सुनाने को तुझसे किताबत की है !

|||फ़राज़|||

जुरअत= Courage, Bravery, 
तसव्वुर-ए-यार= Imagination of Beloved.
तरफ़दारी= Leaning
दिल-ए-नादां= Innocent Heart, Improvident. 
ज़हन = Mind
मुख़ालिफ़त= Opposition, Disagreement
मय= Wine, Liquor. 
मयकदा= Bar, Tavern
साक़ी= One who serves wine,
मयकशी= Boozing, To drink
मुद्दत= Period, Time, Duration.
तस्कीन= Comfort.
वाबस्ता= Related, Connected. Bound together.
रहमत = Divine blessing, Divine mercy, Kindness
इबादत = Prayer, Adoration.
सफ़र= Journey.
नेक= Good, Virtuous.
जन्नत= Paradise, Heaven.
ताज़गी= Freshness. Newness.
फ़ुर्सत= Leisure
हाल-ए-दिल= Condition of heart.
किताबत= Writing, Calligraphy.
तरन्नुम= Modulation, A kind of song.
ख़याल= Thought, Imagination.
उल्फ़त= Love, Affection,