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मंगलवार, 20 फ़रवरी 2018

!!! दिल-ए-फ़ित्ना !!!

नहीं सुनता मैं अब दिल की, स्याना हो गया हूँ मैं,
इसी दिल में तो मुझको इश्क़ की चाहत में डाला था !

ज़हन ने लाख रोका थादिल-ए-फ़ित्ना सुनता था,
दिल-ए-फ़ित्ना ही था जिसने हमें उल्फ़त में डाला था !

क्यूँ दें इल्ज़ाम हम इन्सान को फ़ितनापरस्ती का,
पहल फ़ित्ना तो इब्लीस ने जन्नत में डाला था !

सबब हैरानियों का था तेरा पहले-पहल मिलना,
तेरे ही रुख़ बदलने ने मुझे हैरत में डाला था !

तेरे ही इश्क़ ने हमको बराह-ए-रास्त दिखलाई,
तेरे ही फ़िराक़ ने हमको बुरी सोहबत में डाला था !

जगा करते थे रातों को, गिना करते थे हम तारे,
तेरे ही इश्क़ ने हमको अजब कसरत में डाला था !

वो एक दरिया जो ज़रिया था मेरी हर एक तसल्ली का,
उस ही दरिया ने हमको प्यास की शिद्दत में डाला था !

जवाब बनके हैं लौटे 'फ़राज़काग़ज़ के वो पुर्ज़े,
जो ख़त इज़्हार-ए-इश्क़ की हसरत में डाला था !

||| फ़राज़ |||

स्याना= Wise, Clever, Shrewd
ज़हन= Mind
दिल-ए-फ़ित्ना= Tempted Heart
उल्फ़त= Love Affection
इल्ज़ाम= Blame,
फ़ितनापरस्ती= Worshiping of temptation.
पहल= Begining, First, Initiative.
फ़ित्ना= Temptation
इब्लीस= Satan, The Devil.
जन्नत= Heaven, Paradise.
सबब= Cause, Reason.
हैरानियां= Amazements, Astonishments, Wonders.
पहले-पहल= Initially, Firstly, Begining.
रुख़= Appearance, Face, Direction.
हैरत= Astonishment, Wonder.
बराह-ए-रास्त= Directing/ Guiding path. The Right Way.
फ़िराक़= Separation, Absence, Departing.
सोहबत= Company, Asociation.
अजब= Strange
कसरत= Exercise
दरिया= River.
ज़रिया= Source
तसल्ली= Solace
शिद्दत= Vehemence, Severity.
काग़ज़= Paper.
पुर्ज़े= Shreds, Pieces.
ख़त= Letter
इज़्हार-ए-इश्क़= To express love.
हसरत= Desire.


मंगलवार, 14 नवंबर 2017

मोहब्बत!!!

दिल बता तूने फ़िर ये कैसी जुरअत की है,
तसव्वुर-ए-यार से ये कैसी मोहब्बत की है !

दिल तेरा बचपना भी जाने कब जाएगा,
तूने फ़िर चाँद को छूने की हसरत की है !

तरफ़दारी दिल-ए-नादां की हर बार मैं करता हूँ,
ज़हन ने तो हर बार दिल की मुख़ालिफ़त की है !

न मय, न मयकदा, न साक़ी, नशा फ़िर भी है,
अजब सी मयकशी मैंने बाद मुद्दत की है !

एक तस्कीन सी वाबस्ता है उन निगाहों में,
वो निगाह प्यार की है, वो निगाह रहमत की है !

तेरे अहसास में मुझे मस्जिद सा सुकून मिलता है,
तुझको जाना है तो मैंने ख़ुदा की भी इबादत की है !

मेरी भटकती रातों में सितारा तू सुबह का है,
एक सफ़र नेक सा तू, एक राह तू जन्नत की है !

तू दोपहर में साया, तू शाम की है लाली,
ताज़गी तू सुबह की, तू रात फ़ुर्सत की है !

अब तरन्नुम सा मुझे हर ख़याल लगता है,
मेरे ख़यालों ने तेरे ख़याल से उल्फ़त की है !

इसे ग़ज़ल न समझ ओ मुझे पढ़ने वाले,
हाल-ए-दिल सुनाने को तुझसे किताबत की है !

|||फ़राज़|||

जुरअत= Courage, Bravery, 
तसव्वुर-ए-यार= Imagination of Beloved.
तरफ़दारी= Leaning
दिल-ए-नादां= Innocent Heart, Improvident. 
ज़हन = Mind
मुख़ालिफ़त= Opposition, Disagreement
मय= Wine, Liquor. 
मयकदा= Bar, Tavern
साक़ी= One who serves wine,
मयकशी= Boozing, To drink
मुद्दत= Period, Time, Duration.
तस्कीन= Comfort.
वाबस्ता= Related, Connected. Bound together.
रहमत = Divine blessing, Divine mercy, Kindness
इबादत = Prayer, Adoration.
सफ़र= Journey.
नेक= Good, Virtuous.
जन्नत= Paradise, Heaven.
ताज़गी= Freshness. Newness.
फ़ुर्सत= Leisure
हाल-ए-दिल= Condition of heart.
किताबत= Writing, Calligraphy.
तरन्नुम= Modulation, A kind of song.
ख़याल= Thought, Imagination.
उल्फ़त= Love, Affection,