SABAB लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
SABAB लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 28 जून 2018

ज़िन्दगी !!!

ज़िन्दगी को ऐ दोस्त, इस तरह जीना होगा,
ये दवा हो या ज़हर, इसे हंस के पीना होगा !

लोगों की तसल्ली से तसल्ली न मिलेगी,
ज़ख्म तेरे अपने हैं, तुझे ख़ुद ही सीना होगा !

शायरी का सबब पूछिये तो महज़ इतना है,
एहसास-बयानी का मख़्सूस क़रीना होगा !

आँखों से बह गए तो क़ीमत न रहेगी,
ये तअ'ल्लुक़ के अश्क़ हैं, इन्हें पीना होगा !

साहिल पे खड़े हो के यूँ न देख तमाशा,
मझधार में कभी तेरा भी सफ़ीना होगा !

शायद तभी होगी शिफ़ा मेरे ग़मों की,
जब मेरी निगाहों में पैकर मदीना होगा !

मेरा दर्द मुझे बताता है कि मैं जिंदा हूँ अभी,
कैसे जियूँगा 'फ़राज़' अगर दर्द ही न होगा !

||| फ़राज़ |||

तसल्ली= Solace, Consolation
सबब= Cause, Reason
एहसास= Feeling
बयानी= Narratory
क़रीना= Manner, Method
तअ'ल्लुक़= Relation, Connection.
अश्क़= Tears
साहिल= The Sea-Shore, Beach, Coast.
मझधार= Vortex, Mid-Stream.
सफ़ीना= Boat, Vessel
ग़म= Sorrow, Grief.
शिफ़ा= Cure, Healing.
पैकर= Form, Appearance, Figure
मदीना= Medina Is A City In Western Saudi Arabia.

रविवार, 6 मई 2018

!!! अल्फ़ाज़ !!!

तो क्या हुआ जो ये जहाँ नाराज़ हो गया,
मैं ख़ुद से राज़ी हुआ तो 'अल्फ़ाज़' हो गया !

एक राज़ कहते-कहते मैं रुक जाता था अक्सर,
लेकिन ग़ज़ल में ज़ाहिर हर राज़ हो गया !

तू बन गया था मेरे अंजाम का सबब,
जब तू गया तो मेरा आग़ाज़ हो गया !

पंखों की बंदिशें और पैरों की बेड़ियाँ,
सब तोड़ मेरा हौसला परवाज़ हो गया !

बदल हम दोनों गए बस फ़र्क़ है इतना,
तू ख़ुदगर्ज़ हो गया, मैं बेनियाज़ हो गया !

मेरी वजह से तुझसे दुनिया को हैं गिले,
ग़म-ए-हयात मेरा कारसाज़ हो गया !

एक पल में छोड़ जाती है रूह जिस्म को,
 बुलबुले, क्यूँ ख़ुद पे तुझे नाज़ हो गया !

इज़्ज़त, दुआ, सुकून, और मेयार, सब मिला,
क़िस्मत से मुझे हासिल नाम-ए-फ़राज़ हो गया !

||| फ़राज़ |||


नाराज़= Displeased, Offended
राज़ी= Satisfied, Agreed, Pleased
राज़= Secret
ज़ाहिर= Open, Evident
अंजाम= Fate, End, Result
सबब= Cause, Reason, Ground
आग़ाज़= Beginning, Commencement.
बंदिशें= Restrictions
बेड़ियाँ= Chains, Shackles.
हौसला= Courage, Morale, 
परवाज़= Flight
फ़र्क़= Difference.
ख़ुदगर्ज़= Selfish, Self-Interested.
बेनियाज़= Carefree, Without Want, Independent.
गिले= Complaints, Lamentations.
ग़म-ए-हयात= Sorrows Of Life
कारसाज़= Benefactor, Guardian, Doer.
रूह= Soul, Spirit
जिस्म= Bode, Substance.
बुलबुले= Bubble
नाज़= Pride
मेयार= Standard
हासिल= Gain
नाम-ए-फ़राज़= Name Of Faraaz (In Respect Of The Great Urdu Poet Ahmed Faraz Sir)

मंगलवार, 20 फ़रवरी 2018

!!! दिल-ए-फ़ित्ना !!!

नहीं सुनता मैं अब दिल की, स्याना हो गया हूँ मैं,
इसी दिल में तो मुझको इश्क़ की चाहत में डाला था !

ज़हन ने लाख रोका थादिल-ए-फ़ित्ना सुनता था,
दिल-ए-फ़ित्ना ही था जिसने हमें उल्फ़त में डाला था !

क्यूँ दें इल्ज़ाम हम इन्सान को फ़ितनापरस्ती का,
पहल फ़ित्ना तो इब्लीस ने जन्नत में डाला था !

सबब हैरानियों का था तेरा पहले-पहल मिलना,
तेरे ही रुख़ बदलने ने मुझे हैरत में डाला था !

तेरे ही इश्क़ ने हमको बराह-ए-रास्त दिखलाई,
तेरे ही फ़िराक़ ने हमको बुरी सोहबत में डाला था !

जगा करते थे रातों को, गिना करते थे हम तारे,
तेरे ही इश्क़ ने हमको अजब कसरत में डाला था !

वो एक दरिया जो ज़रिया था मेरी हर एक तसल्ली का,
उस ही दरिया ने हमको प्यास की शिद्दत में डाला था !

जवाब बनके हैं लौटे 'फ़राज़काग़ज़ के वो पुर्ज़े,
जो ख़त इज़्हार-ए-इश्क़ की हसरत में डाला था !

||| फ़राज़ |||

स्याना= Wise, Clever, Shrewd
ज़हन= Mind
दिल-ए-फ़ित्ना= Tempted Heart
उल्फ़त= Love Affection
इल्ज़ाम= Blame,
फ़ितनापरस्ती= Worshiping of temptation.
पहल= Begining, First, Initiative.
फ़ित्ना= Temptation
इब्लीस= Satan, The Devil.
जन्नत= Heaven, Paradise.
सबब= Cause, Reason.
हैरानियां= Amazements, Astonishments, Wonders.
पहले-पहल= Initially, Firstly, Begining.
रुख़= Appearance, Face, Direction.
हैरत= Astonishment, Wonder.
बराह-ए-रास्त= Directing/ Guiding path. The Right Way.
फ़िराक़= Separation, Absence, Departing.
सोहबत= Company, Asociation.
अजब= Strange
कसरत= Exercise
दरिया= River.
ज़रिया= Source
तसल्ली= Solace
शिद्दत= Vehemence, Severity.
काग़ज़= Paper.
पुर्ज़े= Shreds, Pieces.
ख़त= Letter
इज़्हार-ए-इश्क़= To express love.
हसरत= Desire.