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शनिवार, 9 मार्च 2019

पहली दुआ

क्या मेरी आजिज़ी इतनी कामिल न थी,
जो थी पहली दुआवो ही हासिल न थी !

बाद तेरे तुझे ही तलाशा किए,
एक सफ़र वो कियाजिसकी मंज़िल न थी !

दिल को हमने ये कह कर के समझा लिया,
शायद मेरी वफ़ा के वो क़ाबिल न थी !

मेरी राह-ए-गुज़र की वो एक शाम थी,
मेरी कश्ती का लेकिन वो साहिल न थी !

शायरी की मिलीं जिससे सारी वजहें,
मेरे अशआ' की वो ही क़ाइल न थी !

मोड़ आया तो'अल्फ़ाज़वो मुड़ गई,
हमसफ़र तो थी लेकिन वो मंज़िल न थी !

||| अल्फ़ाज़ |||

आजिज़ी = Helplessness, Humility, असहायता 
कामिल = Perfect, Complete, पूरापूर्णसंपूर्ण,
हासिल = Gain, Result, प्राप्तउपलब्ध
तलाशा = Search, खोज
क़ाबिल = Deserving, पात्र
सफ़र = Journey, Voyage, Travel, यात्रा
राह-ए-गुज़र = Road, Path, रास्तापथमार्ग 
साहिल = The Sea-Shore, Beach, Coast, तटकिनारा
अशआ'र = Couplets
क़ाइल = Agree, Consent, Convince, Acknowledge
हमसफ़र = Fellow-Traveler

सोमवार, 21 जनवरी 2019

मोड़

उस मोड़ पे तो हम दोनों थे,
हम ठहर गएतुम गुज़र गए !

नज़दीक कभी न आये थे,
नज़दीक से ऐसे गुज़र गए !

कल की क़समें तुम खाते थे,
पर मेरे आज से डर गए !

सैलाब की आहट पाते ही,
तुम साहिल पर ही उतर गए !

जब होश हुआ तो तुम न थे,
तुम तो नशे सा उतर गए !

तुम जैसी शक्ल-ओ-सूरत के,
थे कौन जो प्यार कर गए !

ग़म उतना नहीं पर कुछ तो है,
बाक़ी हैं निशाँज़ख़्म भर गए !

'अल्फ़ाज़परिंदे यार थे जो,
लौटे ही नहीं जब शहर गए !

||| अल्फ़ाज़ ||| 

नज़दीक = Near, close
सैलाब = A Flood, Deluge, Inundation, Torrent
साहिल = The Sea-Shore, Beach, Coast
होश = Sense
शक्ल-ओ-सूरत = Face, Objectiveness
ग़म = Grief, Sorrow
निशाँ = Imprint, Sign, Mark
परिंदे = Birds

शुक्रवार, 9 नवंबर 2018

तड़प

कुन पे फ़या कुन मुझे होती नहीं हासिल,
शायद मेरी तड़प ही अभी है नहीं कामिल !

रूठा है इतना मुझसे कि मरहम तो छोड़िये,
रब मुझपे तो अज़ाब भी करता नहीं नाज़िल !

काग़ज़ की कश्तियों सी हसरत न पालिए,
काग़ज़ की कश्तियों के होते नहीं साहिल !

वो हैं नहीं जाहिल कि जो मक़तब नहीं गए,
पढ़-लिख के बेशऊर हैंवो लोग हैं जाहिल !

उस आम सी हसीं में कुछ ख़ास है ज़रूर,
हर एक से तो दिल ये होता नहीं माइल !

क्या बात है दिलों की बस जानता है दिल,
समझेगा ज़हन कैसे, दिल की है क्या मुश्किल !

रंगीन मह्फ़िलों में वासिल जो यार थे,
बरबादियों में मेरी क्यूँ हैं नहीं शामिल !

इंसाफ़ की मीज़ान पे गर तौलिये ख़ुद को,
आदिल भी तेरे अद्ल के हो जायेंगे क़ाइल !

'अल्फ़ाज़अपनी शह से हम मात खा गए,
शायद है दोस्तों में दुश्मन कोई शामिल !


||| अल्फ़ाज़ ||

कुन फ़याकुन = Be And It Happens-Command Of God
हासिल = Gain, Result
कामिल = Perfect, Complete
मरहम = Ointment
अज़ाब = Torment, Agony
नाज़िल  = Descending, Arriving At
काग़ज़ = Paper
कश्ती = A Boat, A Ship,
हसरत = Unfulfilled Desire
साहिल = The Sea-Shore, Beach, Coast
जाहिल = Illiterate
मकतब = School, Academy
बे-शऊर = Immoral, Improper, Indecent. 
आम= Common, General
हसीं= Beautiful
माइल= Inclined, Attracted, Bent
ज़हन= Mind,
महफ़िल= Assembly, Gathering, Party
वासिल= Joined, One Who Meets, Connected Together
इंसाफ़= Justice, Fair Play, Equity
मीज़ान= Balance, Scale
आदिल= Just, Justice
अद्ल= Justice, Equity, Fairness, Fair-Play
क़ाइल= Agree, Consent, Convince, 

सोमवार, 8 अक्टूबर 2018

तिश्नगी

साहिल पे ला के हमको यूँ तिश्ना न कीजिये,
ढलती है रात अब तो पर्दा न कीजिये !

तिश्नगी दीदार की बढ़ जाएगीसुनिए,
चेहरा हथेलियों में छुपाया न कीजिये !

ऐसी भी क्या नज़र के मैं ईमान से जाऊँ,
यूँ मद-भरी निगाह से देखा न कीजिये !

जीते जी आप हमको मारा न कीजिये,
बिखरी हुई ये ज़ुल्फ़ संवारा न कीजिये !

है क्या ख़बर कि सच में मेरी जाँ चली जाये,
झूठी कसम यूँ जान की खाया न कीजिये !

किसको ख़बर कि कौन सा लम्हा है आख़िरी,
छोटी सी ज़िन्दगी हैरूठा ना कीजिये !

किस किस से बैर लेंकिस किस से हम लड़ें,
यूँ बे-नक़ाब हो के निकला न कीजिये !

रुक रुक के जाँ निकलती है अल्फ़ाज़ की जानाँ,
हंस हंस के यूँ ग़ैरों से तो बोला न कीजिये !

||| अल्फ़ाज़ |||

तिश्नगी= Thirst, Longing
दीदार= Appearance, Sight, Seeing
ईमान= Belief, Conscience, Creed, Faith
मद-भरी= Full Of Intoxication, Ecstasy, Wantonness, Lust
ज़ुल्फ़= A Curling Lock (Of Hair)Hanging Over The Temple Or Ear, Tresses
जाँ= Life, Soul
बैर= Enmity, Hostility
बे-नक़ाब= Unveiled
जानाँ=  A Loved One, A Sweetheart, Dear
ग़ैर= Stranger, Outsider

सोमवार, 3 सितंबर 2018

मंज़िल


दूर सही, एक मंज़िल है,
धुंधला ही सही, एक साहिल है !

कुछ भी नहीं है नामुमकिन,
एक राह ज़रा सी मुश्किल है !

दुनिया की फ़िक्र में ऐ इंसाँ,
तू ख़ुद से क्यूँ इतना ग़ाफ़िल है !

मत हार, लड़ाई बाक़ी है,
जीता न सही, तू क़ाबिल है !

चादर में समेटो पैरों को,
क़िस्मत में था जितनाहासिल है !

जहाँ कोई क़दम न पहुँचा हो,
फ़राज़की वही तो मंज़िल है !

||| फ़राज़ |||

मंज़िल= Stage, Destination
साहिल= The Sea-Shore, Coast, Beach
नामुमकिन= Impossible
फ़िक्र= Concern, Thought
इंसाँ= Human, Mankind
ग़ाफ़िल= Negligent, Oblivious
क़ाबिल= Able, Competent, Deserving
हासिल= Gain, Profit

गुरुवार, 28 जून 2018

ज़िन्दगी !!!

ज़िन्दगी को ऐ दोस्त, इस तरह जीना होगा,
ये दवा हो या ज़हर, इसे हंस के पीना होगा !

लोगों की तसल्ली से तसल्ली न मिलेगी,
ज़ख्म तेरे अपने हैं, तुझे ख़ुद ही सीना होगा !

शायरी का सबब पूछिये तो महज़ इतना है,
एहसास-बयानी का मख़्सूस क़रीना होगा !

आँखों से बह गए तो क़ीमत न रहेगी,
ये तअ'ल्लुक़ के अश्क़ हैं, इन्हें पीना होगा !

साहिल पे खड़े हो के यूँ न देख तमाशा,
मझधार में कभी तेरा भी सफ़ीना होगा !

शायद तभी होगी शिफ़ा मेरे ग़मों की,
जब मेरी निगाहों में पैकर मदीना होगा !

मेरा दर्द मुझे बताता है कि मैं जिंदा हूँ अभी,
कैसे जियूँगा 'फ़राज़' अगर दर्द ही न होगा !

||| फ़राज़ |||

तसल्ली= Solace, Consolation
सबब= Cause, Reason
एहसास= Feeling
बयानी= Narratory
क़रीना= Manner, Method
तअ'ल्लुक़= Relation, Connection.
अश्क़= Tears
साहिल= The Sea-Shore, Beach, Coast.
मझधार= Vortex, Mid-Stream.
सफ़ीना= Boat, Vessel
ग़म= Sorrow, Grief.
शिफ़ा= Cure, Healing.
पैकर= Form, Appearance, Figure
मदीना= Medina Is A City In Western Saudi Arabia.

बुधवार, 13 जून 2018

सफ़र !!!

कभी धूप का सफ़र, तो कभी छाँव का सफ़र,
एक तलातुम से झगड़ती मेरी नाव का सफ़र !

पा के मंज़िल को भी सफ़र में हम हैं
ख़त्म होता नहीं इश्क़ की राहों का सफ़र !

मेरे दर्द से तकलीफ़ कभी उनको भी हो,
कभी उन तक भी तो पहुंचे मेरी आहों का सफ़र !

वो भंवर था हमने जिसको साहिल समझा,
अब तो जाँ पे बन आया है वफ़ाओं का सफ़र !

मेरे पैरों में बेड़ियाँ मेरे हालात की हैं,
वरना लम्बा तो नहीं यहाँ से मेरे गाँव का सफ़र !

ख़ुद को तलाशता हूँ मैं अह्ल-ए-नज़र,
आईना दिखलाता है निगाहों का सफ़र !

जबीं रोज़ पूछती है ख़ुदा से सजदा करके !
मुकम्मल कब होगा मेरी दुआओं का सफ़र !

चाहतें जन्नत की दिल में रखता है 'फ़राज़',
फ़िर भी करता है शब्-ओ-रोज़ गुनाहों का सफ़र !

||| फ़राज़ |||

सफ़र= Journey
तलातुम= Sea-Storm, High Tide, Upheaval
मंज़िल= Destination, Stage
तकलीफ़= Trouble, Difficulty
आहों= Sighs, Moans.
भंवर= Whirlpool Vortex
साहिल= The Sea-Shore, Coast, Bank, 
जाँ= Life, Soul
वफ़ा= Fidelity, Faithfulness.
बेड़ियाँ= Shackles, Chains
हालात= Circumstances, Condition
वरना= Else, Otherwise
तलाशता= Search, Investigation, Quest, 
अह्ल-ए-नज़र= People Of Vision
आईना= Mirror
जबीं= Forehead
सजदा= Bowing In Prayer So As To Touch The Ground With The Forehead
मुकम्मल= Complete, Perfect
दुआ= Prayer
चाहत= Affection, Appetite
जन्नत= Paradise
शब्-ओ-रोज़= Night And Day
गुनाह= Sin, Crime, Fault