sailab लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
sailab लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 21 जनवरी 2019

मोड़

उस मोड़ पे तो हम दोनों थे,
हम ठहर गएतुम गुज़र गए !

नज़दीक कभी न आये थे,
नज़दीक से ऐसे गुज़र गए !

कल की क़समें तुम खाते थे,
पर मेरे आज से डर गए !

सैलाब की आहट पाते ही,
तुम साहिल पर ही उतर गए !

जब होश हुआ तो तुम न थे,
तुम तो नशे सा उतर गए !

तुम जैसी शक्ल-ओ-सूरत के,
थे कौन जो प्यार कर गए !

ग़म उतना नहीं पर कुछ तो है,
बाक़ी हैं निशाँज़ख़्म भर गए !

'अल्फ़ाज़परिंदे यार थे जो,
लौटे ही नहीं जब शहर गए !

||| अल्फ़ाज़ ||| 

नज़दीक = Near, close
सैलाब = A Flood, Deluge, Inundation, Torrent
साहिल = The Sea-Shore, Beach, Coast
होश = Sense
शक्ल-ओ-सूरत = Face, Objectiveness
ग़म = Grief, Sorrow
निशाँ = Imprint, Sign, Mark
परिंदे = Birds

शुक्रवार, 22 जून 2018

दिल की ज़बानी !!!

सीने से लगा के आपको धड़कन सुनानी है,
दिल ही समझ पाएगा जो दिल की ज़बानी है !

मेरी सुनता है कहाँ दिल जो तेरी सुने,
दिल-ए-नादाँ ने भला कब किसी की मानी है !

मेरी नज़रों से आप कभी ख़ुद को देखिये,
किस क़दर मेरी नज़र आपकी दीवानी है !

तू सैलाब सा बहता है मेरी रग-रग में,
मैं ठहरा समंदर सातू मौज की रवानी है !

तपते सहरा में तेरा साथ है बाईस-ए-सुकूँ,
तू साथ है तो अमावास रात भी नूरानी है !

अब्र के साए सा साथ-साथ चलता है,
तू साथ है तो ख़िज़ाँ भी शादमानी है !

मुझपे बरस जाओ घिर के कभी सावन की तरह,
मैं तपता हुआ सहरातू बारिश का पानी है !

मुझसे हर मोड़ पर तू मिल ही जाता है,
कुछ तो ज़रूर तेरी मेरी कहानी है !

तेरा तसव्वुर भी पाकीज़गी से करता हूँ मैं,
दरमियाँ कुछ तो है ‘फ़राज़’ जो रूहानी है ! 

||| फ़राज़ |||


ज़बानी= By Word Of Mouth, Orally, Verbal, Verbally
दिल-ए-नादाँ= Innocent Heart
ख़ुद= Self
क़दर= Amount
नज़र= Eye, Vision
सैलाब= A Flood, Deluge, Inundation, Torrent
रग= Vein, Artery, Fiber, Nerve
मौज= Wave
रवानी= Fluency, Sharpness, Speed, Flow
सहरा= Desert, Wilderness
बाईस-ए-सुकूँ= Reason For Peace And Tranquility
नूरानी= Luminous, Resplendent
अब्र= Cloud
ख़िज़ाँ= Autumn
शादमानी= Happiness
तसव्वुर= Imagination, Thought
पाकीज़गी= Purity
दरमियाँ= Between
रूहानी= Spiritual

रविवार, 14 जनवरी 2018

आरज़ी !!!

माना कि शग़्ल है ये बंद आँखों का,
झूठा ही सहीशुक्र है एक ख़्वाब तो है !

नज़र भर देख लेने में भला हर्ज भी क्या है,
कि आरज़ी ही सहीरु-ब-रु सराब तो है !

अब तलक तो यही सोच कर संभाल रखा है,
कि सूखा ही सही, मगर ये वही गुलाब तो है !

मेरी ही चाहत थी कि सबकुछ मुझे बेपनाह मिले,
अब दर्द-ए-दिल है तो क्या हुआबेहिसाब तो है !

दिल-ए-बर्बाद को डर था कि जी पायेंगे कैसे,
और हमने दिल को समझायाकि शराब तो है !

क्या महज़ इस तर्क पे मैं तुझे मुसलमां कह दूं ?
कि तू शराबी है तो क्याअहल-ए-किताब तो है ?

शायद ख़ुदा मुझे अभी इतना भी नहीं भूला है,
कि राहतें न सही तो क्यामुझपे अज़ाब तो है !

कुछ तो सीखेगा हुनर 'फ़राज़तू हर शय से,
कि रू-ब-रु साहिल नहीं तो क्यासैलाब तो है !

|||फ़राज़|||

शग़्ल= Hobby
शुक्र= Thank
ख़्वाब= Dream
हर्ज= Loss, Harm, Trouble
आरज़ी= Temporary.
रू-ब-रु= In front of, Face to face.
सराब= Mirage, Illusion. 
तलक= Till
बेपनाह= Boundless, Limitless, Unlimited, Unending.
दर्द-ए-दिल= Heart's Grief,
बेहिसाब= Countless, Unlimited, Excessive.
दिल-ए-बर्बाद= Ruined heart.
महज़= Merely, Only.
तर्क= Argument, Supposition, Reasoning.
मुसलमां= The Muslim
अहल-ए-किताब= People of the divine book (Referring to The Muslim, The Jews, The Christians, and The Zoroastrians)
राहतें= Rest, Comfort, Ease.
अज़ाब= Torment, Agony.
हुनर= Art, Skill, Knowledge.
शय= Things, Object.
साहिल= The sea-shore, Beach, Cost.
सैलाब= Flood, Deluge, Inundation, Torrent.