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शुक्रवार, 22 जून 2018

दिल की ज़बानी !!!

सीने से लगा के आपको धड़कन सुनानी है,
दिल ही समझ पाएगा जो दिल की ज़बानी है !

मेरी सुनता है कहाँ दिल जो तेरी सुने,
दिल-ए-नादाँ ने भला कब किसी की मानी है !

मेरी नज़रों से आप कभी ख़ुद को देखिये,
किस क़दर मेरी नज़र आपकी दीवानी है !

तू सैलाब सा बहता है मेरी रग-रग में,
मैं ठहरा समंदर सातू मौज की रवानी है !

तपते सहरा में तेरा साथ है बाईस-ए-सुकूँ,
तू साथ है तो अमावास रात भी नूरानी है !

अब्र के साए सा साथ-साथ चलता है,
तू साथ है तो ख़िज़ाँ भी शादमानी है !

मुझपे बरस जाओ घिर के कभी सावन की तरह,
मैं तपता हुआ सहरातू बारिश का पानी है !

मुझसे हर मोड़ पर तू मिल ही जाता है,
कुछ तो ज़रूर तेरी मेरी कहानी है !

तेरा तसव्वुर भी पाकीज़गी से करता हूँ मैं,
दरमियाँ कुछ तो है ‘फ़राज़’ जो रूहानी है ! 

||| फ़राज़ |||


ज़बानी= By Word Of Mouth, Orally, Verbal, Verbally
दिल-ए-नादाँ= Innocent Heart
ख़ुद= Self
क़दर= Amount
नज़र= Eye, Vision
सैलाब= A Flood, Deluge, Inundation, Torrent
रग= Vein, Artery, Fiber, Nerve
मौज= Wave
रवानी= Fluency, Sharpness, Speed, Flow
सहरा= Desert, Wilderness
बाईस-ए-सुकूँ= Reason For Peace And Tranquility
नूरानी= Luminous, Resplendent
अब्र= Cloud
ख़िज़ाँ= Autumn
शादमानी= Happiness
तसव्वुर= Imagination, Thought
पाकीज़गी= Purity
दरमियाँ= Between
रूहानी= Spiritual