माना कि शग़्ल है ये बंद आँखों का,
झूठा ही सही, शुक्र है एक ख़्वाब तो है !
नज़र भर देख लेने में भला हर्ज भी क्या है,
कि आरज़ी ही सही, रु-ब-रु सराब तो है !
अब तलक तो यही सोच कर संभाल रखा है,
कि सूखा ही सही, मगर ये वही गुलाब तो है !
मेरी ही चाहत थी कि सबकुछ मुझे बेपनाह मिले,
अब दर्द-ए-दिल है तो क्या हुआ, बेहिसाब तो है !
दिल-ए-बर्बाद को डर था कि जी पायेंगे कैसे,
और हमने दिल को समझाया, कि शराब तो है !
क्या महज़ इस तर्क पे मैं तुझे मुसलमां कह दूं ?
कि तू शराबी है तो क्या, अहल-ए-किताब तो है ?
शायद ख़ुदा मुझे अभी इतना भी नहीं भूला है,
कि राहतें न सही तो क्या, मुझपे अज़ाब तो है !
कुछ तो सीखेगा हुनर 'फ़राज़' तू हर शय से,
कि रू-ब-रु साहिल नहीं तो क्या, सैलाब तो है !
|||फ़राज़|||
|||फ़राज़|||
शग़्ल= Hobby
शुक्र= Thank
ख़्वाब= Dream
हर्ज= Loss, Harm, Trouble
आरज़ी= Temporary.
रू-ब-रु= In front of, Face to face.
सराब= Mirage, Illusion.
तलक= Till
बेपनाह= Boundless, Limitless, Unlimited, Unending.
दर्द-ए-दिल= Heart's Grief,
बेहिसाब= Countless, Unlimited, Excessive.
दिल-ए-बर्बाद= Ruined heart.
महज़= Merely, Only.
तर्क= Argument, Supposition, Reasoning.
मुसलमां= The Muslim
अहल-ए-किताब= People of the divine book
(Referring to The Muslim, The Jews, The Christians, and The Zoroastrians)
राहतें= Rest, Comfort, Ease.
अज़ाब= Torment, Agony.
हुनर= Art, Skill, Knowledge.
शय= Things, Object.
साहिल= The sea-shore, Beach, Cost.
सैलाब= Flood, Deluge, Inundation, Torrent.
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