शुक्रवार, 26 जनवरी 2018

मोमिन !!!

मुझे मस्जिद में जाना है, तुझे मंदर में जाना है,
ख़ुदा ही एक है जिसको, सभी के घर में जाना है !

तेरी हस्ती ही क्या है जो, तू ये बतलायेगा रब को,
ख़ुदा को किस इमारत में ख़ुदा का घर बनाना है !

बड़ा ही फ़ख़्र  है ग़ाफ़िल तुझे अपनी सख़ावत पर,
तू क्या दे पायेगा उस रब को, कि उसका तो ज़माना है !

लगा ले सारी तरकीबें, ज़माने को कमाने की,
यही एक सच है इंसां का, कि ख़ाली हाथ जाना है !

मुझे है जानना मक़सद, मेरे दुनिया में आने का,
तू कर ख़्वाहिश ज़माने की, मुझे तो ख़ुद को पाना है !

इसी मिट्टी से पैदा हैं सभी मोमिन सभी काफ़िर,
यही तामीर-ए-मस्जिद है, यही बुत का भी ख़ाना है !

इसी मिट्टी से तू पैदा, इसी मिट्टी से मैं पैदा,
फ़र्क़ क्यूँ है अक़ीदे में, बहुत मुश्किल बताना है !

नज़र तुझको भी एक दिन वो, मलक-उल-मौत आयेंगे,
कि हर ज़िन्दा बशर के रु-ब-रु ये पेश आना है !

शुक्र इतना भी क्या कम है की मैं ज़िन्दा सलामत हूँ,
कब्र का हाल तो 'फ़राज़', महज़ मुर्दों ने जाना है !

||| फ़राज़ |||

मस्जिद= Mosque.
मंदर= Temple.
हस्ती= Existence
रब= God.
ख़ुदा= God.
इमारत= Building
फ़ख़्र= Pride, A thing to be proud of boasting.
ग़ाफ़िल= Negligent, Neglectful, Oblivious.
सख़ावत= Generosity.
ज़माना= Time, World.
तरकीबें= Tricks
इंसां= Human, man, mankind
मक़सद= Intention, purpose, object.
ख़्वाहिश= Wish, Will.
मोमिन= Believer (in Islam), Pious.
काफ़िर= Infidel, Impious.
तामीर-ए-मस्जिद= Construction of Mosque
बुत= Idol.
ख़ाना= House
फ़र्क़=Difference.
अक़ीदा= Fundamental doctrine of Belief. Tenet.
मलक-उल-मौत= Say, "The Angel Of Death Will Take You Who Has Been Entrusted With You. Then To Your Lord, You Will Be Returned." (Quran Surah 32:11)
ज़िन्दा= Alive, Living.
बशर= Man, Human being.
रु-ब-रु= Face to face, in person, In front of.
पेश= Happen.
शुक्र= Thank
सलामत= Safe. 
कब्र= Grave.
महज़= Merely, only.
मुर्दा= Dead.

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