आँखों से छलक ही जाती है,
ख़ुशियों की ख़बर को क्या कहिये !
पढ़ लेते हैं मेरी ख़ामोशी,
अपनों की नज़र को क्या कहिये !
बेफ़िक्र सा कुछ हो जाता हूँ,
बचपन का ज़िक्र को क्या कहिये !
ज़िन्दगी सिमट के रह जाती है,
शहरों में हो घर तो क्या कहिये !
वाक़िफ़ हूँ ख़ुदा के हुक्मों से,
||| फ़राज़ |||
ख़बर= News
ख़ामोशी= Silence
नज़र= Vision
बेफ़िक्र= Casual, Carefree.
ज़िक्र= Narration, Remembrance, Talk
ख़ुशियों की ख़बर को क्या कहिये !
पढ़ लेते हैं मेरी ख़ामोशी,
अपनों की नज़र को क्या कहिये !
बेफ़िक्र सा कुछ हो जाता हूँ,
बचपन का ज़िक्र को क्या कहिये !
ज़िन्दगी सिमट के रह जाती है,
शहरों में हो घर तो क्या कहिये !
वाक़िफ़ हूँ ख़ुदा के हुक्मों से,
दिल में न हो डर तो क्या कहिये !
हर नक़्श-ए-क़दम पर इबरत है
'फ़राज़' के सफ़र को क्या कहिये !||| फ़राज़ |||
ख़बर= News
ख़ामोशी= Silence
नज़र= Vision
बेफ़िक्र= Casual, Carefree.
ज़िक्र= Narration, Remembrance, Talk
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