उस मोड़ पे तो हम दोनों थे,
हम ठहर गए, तुम गुज़र गए !
नज़दीक कभी न आये थे,
नज़दीक से ऐसे गुज़र गए !
कल की क़समें तुम खाते थे,
पर मेरे आज से डर गए !
सैलाब की आहट पाते ही,
तुम साहिल पर ही उतर गए !
जब होश हुआ तो तुम न थे,
तुम तो नशे सा उतर गए !
तुम जैसी शक्ल-ओ-सूरत के,
थे कौन जो प्यार कर गए !
ग़म उतना नहीं पर कुछ तो है,
बाक़ी हैं निशाँ, ज़ख़्म भर गए !
'अल्फ़ाज़' परिंदे यार थे जो,
||| अल्फ़ाज़ |||
नज़दीक = Near, close
सैलाब = A Flood, Deluge, Inundation, Torrent
सैलाब = A Flood, Deluge, Inundation, Torrent
साहिल = The Sea-Shore, Beach, Coast
होश = Sense
शक्ल-ओ-सूरत = Face, Objectiveness
ग़म = Grief, Sorrow
निशाँ = Imprint, Sign, Mark
परिंदे = Birds
परिंदे = Birds