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शुक्रवार, 5 अप्रैल 2019

आम चुनाव

मंदिर-मस्जिद पे दांव है,
शायद फ़िर आम चुनाव है !

जितना दिखता है ख़बरों में,
उतना भी कहाँ तनाव है !

फ़िर क़र्ज़ों की माफ़ी होगी,
फ़िर से ख़बरों में गाँव है !

बस धुआँ हैआग नहीं होगी,
कच्ची लकड़ी का अलाव है !

बस सूँघोखा न पाओगे,
वादों का ख़याली पुलाव है !

फ़िर अच्छे कल की बातें हैं,
फ़िर से काग़ज़ की नाव है !

'अल्फ़ाज़तू सच क्यूँ कहता है,
अब झूठ को मिलता भाव है !

||| अल्फ़ाज़ |||

दांव = Gamble
आम चुनाव = General Elections
तनाव = Tension
क़र्ज़ माफ़ी = Loan Waiving
अलाव = Bonfire, Campfire
ख़याली-पुलाव = Daydreaming, Building A Castle In The Air
भाव = Rate, Price

बुधवार, 13 जून 2018

सफ़र !!!

कभी धूप का सफ़र, तो कभी छाँव का सफ़र,
एक तलातुम से झगड़ती मेरी नाव का सफ़र !

पा के मंज़िल को भी सफ़र में हम हैं
ख़त्म होता नहीं इश्क़ की राहों का सफ़र !

मेरे दर्द से तकलीफ़ कभी उनको भी हो,
कभी उन तक भी तो पहुंचे मेरी आहों का सफ़र !

वो भंवर था हमने जिसको साहिल समझा,
अब तो जाँ पे बन आया है वफ़ाओं का सफ़र !

मेरे पैरों में बेड़ियाँ मेरे हालात की हैं,
वरना लम्बा तो नहीं यहाँ से मेरे गाँव का सफ़र !

ख़ुद को तलाशता हूँ मैं अह्ल-ए-नज़र,
आईना दिखलाता है निगाहों का सफ़र !

जबीं रोज़ पूछती है ख़ुदा से सजदा करके !
मुकम्मल कब होगा मेरी दुआओं का सफ़र !

चाहतें जन्नत की दिल में रखता है 'फ़राज़',
फ़िर भी करता है शब्-ओ-रोज़ गुनाहों का सफ़र !

||| फ़राज़ |||

सफ़र= Journey
तलातुम= Sea-Storm, High Tide, Upheaval
मंज़िल= Destination, Stage
तकलीफ़= Trouble, Difficulty
आहों= Sighs, Moans.
भंवर= Whirlpool Vortex
साहिल= The Sea-Shore, Coast, Bank, 
जाँ= Life, Soul
वफ़ा= Fidelity, Faithfulness.
बेड़ियाँ= Shackles, Chains
हालात= Circumstances, Condition
वरना= Else, Otherwise
तलाशता= Search, Investigation, Quest, 
अह्ल-ए-नज़र= People Of Vision
आईना= Mirror
जबीं= Forehead
सजदा= Bowing In Prayer So As To Touch The Ground With The Forehead
मुकम्मल= Complete, Perfect
दुआ= Prayer
चाहत= Affection, Appetite
जन्नत= Paradise
शब्-ओ-रोज़= Night And Day
गुनाह= Sin, Crime, Fault

रविवार, 16 अक्टूबर 2016

जाने वाले नहीं फ़िर लौट कर आने वाले !!!

है पूछता बारिश का पानी मुझसे
कहाँ गए वो काग़ज़ की नाव चलने वाले,

अपनों की शिक़ायत ग़ैरों से क्या करूँ
ख़ुद रूठ गए मुझको मनाने वाले,

एक हवा का झौंका तूफ़ान हो गया
     ख़्वाब हो गए सब साथ निभाने वाले,

इल्ज़ाम हमने सारे तस्लीम कर लिए
मायूस हो गए इल्ज़ाम लगाने वाले,

एक बादल का टुकड़ा देखा तो याद आया,
जाने वाले फ़िर नहीं  लौट कर आने वाले !!!

||| फ़राज़ |||