bediyan लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
bediyan लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, 13 जून 2018

सफ़र !!!

कभी धूप का सफ़र, तो कभी छाँव का सफ़र,
एक तलातुम से झगड़ती मेरी नाव का सफ़र !

पा के मंज़िल को भी सफ़र में हम हैं
ख़त्म होता नहीं इश्क़ की राहों का सफ़र !

मेरे दर्द से तकलीफ़ कभी उनको भी हो,
कभी उन तक भी तो पहुंचे मेरी आहों का सफ़र !

वो भंवर था हमने जिसको साहिल समझा,
अब तो जाँ पे बन आया है वफ़ाओं का सफ़र !

मेरे पैरों में बेड़ियाँ मेरे हालात की हैं,
वरना लम्बा तो नहीं यहाँ से मेरे गाँव का सफ़र !

ख़ुद को तलाशता हूँ मैं अह्ल-ए-नज़र,
आईना दिखलाता है निगाहों का सफ़र !

जबीं रोज़ पूछती है ख़ुदा से सजदा करके !
मुकम्मल कब होगा मेरी दुआओं का सफ़र !

चाहतें जन्नत की दिल में रखता है 'फ़राज़',
फ़िर भी करता है शब्-ओ-रोज़ गुनाहों का सफ़र !

||| फ़राज़ |||

सफ़र= Journey
तलातुम= Sea-Storm, High Tide, Upheaval
मंज़िल= Destination, Stage
तकलीफ़= Trouble, Difficulty
आहों= Sighs, Moans.
भंवर= Whirlpool Vortex
साहिल= The Sea-Shore, Coast, Bank, 
जाँ= Life, Soul
वफ़ा= Fidelity, Faithfulness.
बेड़ियाँ= Shackles, Chains
हालात= Circumstances, Condition
वरना= Else, Otherwise
तलाशता= Search, Investigation, Quest, 
अह्ल-ए-नज़र= People Of Vision
आईना= Mirror
जबीं= Forehead
सजदा= Bowing In Prayer So As To Touch The Ground With The Forehead
मुकम्मल= Complete, Perfect
दुआ= Prayer
चाहत= Affection, Appetite
जन्नत= Paradise
शब्-ओ-रोज़= Night And Day
गुनाह= Sin, Crime, Fault

रविवार, 6 मई 2018

!!! अल्फ़ाज़ !!!

तो क्या हुआ जो ये जहाँ नाराज़ हो गया,
मैं ख़ुद से राज़ी हुआ तो 'अल्फ़ाज़' हो गया !

एक राज़ कहते-कहते मैं रुक जाता था अक्सर,
लेकिन ग़ज़ल में ज़ाहिर हर राज़ हो गया !

तू बन गया था मेरे अंजाम का सबब,
जब तू गया तो मेरा आग़ाज़ हो गया !

पंखों की बंदिशें और पैरों की बेड़ियाँ,
सब तोड़ मेरा हौसला परवाज़ हो गया !

बदल हम दोनों गए बस फ़र्क़ है इतना,
तू ख़ुदगर्ज़ हो गया, मैं बेनियाज़ हो गया !

मेरी वजह से तुझसे दुनिया को हैं गिले,
ग़म-ए-हयात मेरा कारसाज़ हो गया !

एक पल में छोड़ जाती है रूह जिस्म को,
 बुलबुले, क्यूँ ख़ुद पे तुझे नाज़ हो गया !

इज़्ज़त, दुआ, सुकून, और मेयार, सब मिला,
क़िस्मत से मुझे हासिल नाम-ए-फ़राज़ हो गया !

||| फ़राज़ |||


नाराज़= Displeased, Offended
राज़ी= Satisfied, Agreed, Pleased
राज़= Secret
ज़ाहिर= Open, Evident
अंजाम= Fate, End, Result
सबब= Cause, Reason, Ground
आग़ाज़= Beginning, Commencement.
बंदिशें= Restrictions
बेड़ियाँ= Chains, Shackles.
हौसला= Courage, Morale, 
परवाज़= Flight
फ़र्क़= Difference.
ख़ुदगर्ज़= Selfish, Self-Interested.
बेनियाज़= Carefree, Without Want, Independent.
गिले= Complaints, Lamentations.
ग़म-ए-हयात= Sorrows Of Life
कारसाज़= Benefactor, Guardian, Doer.
रूह= Soul, Spirit
जिस्म= Bode, Substance.
बुलबुले= Bubble
नाज़= Pride
मेयार= Standard
हासिल= Gain
नाम-ए-फ़राज़= Name Of Faraaz (In Respect Of The Great Urdu Poet Ahmed Faraz Sir)