beniyaz लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
beniyaz लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 6 मई 2018

!!! अल्फ़ाज़ !!!

तो क्या हुआ जो ये जहाँ नाराज़ हो गया,
मैं ख़ुद से राज़ी हुआ तो 'अल्फ़ाज़' हो गया !

एक राज़ कहते-कहते मैं रुक जाता था अक्सर,
लेकिन ग़ज़ल में ज़ाहिर हर राज़ हो गया !

तू बन गया था मेरे अंजाम का सबब,
जब तू गया तो मेरा आग़ाज़ हो गया !

पंखों की बंदिशें और पैरों की बेड़ियाँ,
सब तोड़ मेरा हौसला परवाज़ हो गया !

बदल हम दोनों गए बस फ़र्क़ है इतना,
तू ख़ुदगर्ज़ हो गया, मैं बेनियाज़ हो गया !

मेरी वजह से तुझसे दुनिया को हैं गिले,
ग़म-ए-हयात मेरा कारसाज़ हो गया !

एक पल में छोड़ जाती है रूह जिस्म को,
 बुलबुले, क्यूँ ख़ुद पे तुझे नाज़ हो गया !

इज़्ज़त, दुआ, सुकून, और मेयार, सब मिला,
क़िस्मत से मुझे हासिल नाम-ए-फ़राज़ हो गया !

||| फ़राज़ |||


नाराज़= Displeased, Offended
राज़ी= Satisfied, Agreed, Pleased
राज़= Secret
ज़ाहिर= Open, Evident
अंजाम= Fate, End, Result
सबब= Cause, Reason, Ground
आग़ाज़= Beginning, Commencement.
बंदिशें= Restrictions
बेड़ियाँ= Chains, Shackles.
हौसला= Courage, Morale, 
परवाज़= Flight
फ़र्क़= Difference.
ख़ुदगर्ज़= Selfish, Self-Interested.
बेनियाज़= Carefree, Without Want, Independent.
गिले= Complaints, Lamentations.
ग़म-ए-हयात= Sorrows Of Life
कारसाज़= Benefactor, Guardian, Doer.
रूह= Soul, Spirit
जिस्म= Bode, Substance.
बुलबुले= Bubble
नाज़= Pride
मेयार= Standard
हासिल= Gain
नाम-ए-फ़राज़= Name Of Faraaz (In Respect Of The Great Urdu Poet Ahmed Faraz Sir)

बुधवार, 13 सितंबर 2017

बेनियाज़ !!!

बेनियाज़ जो तुझसे हम ज़रा हो गए,
इल्ज़ाम ये आया कि हम बेवफ़ा हो गए !

ख़ुदसे कोई शिक़ायत न रही बाक़ी,
जबसे तुझसे ही हम ख़फ़ा हो गए !

तेरे मसअले पर हम कुछ यूँ मिसाल हुए,
जीती जागती सी एक तालीमगाह हो गए !

हमें ही तो था इश्क़ उस जलती लौ से,
बरहा पतंगे की तरह हम फ़ना हो गए !

छुपा न पाएगी उन्हें कफ़न की चादर,
राज़-ए-ज़मीर जो तेरे बेरिदा हो गए !

उनका ख़ुदा शायद कोई और ही होगा,
क़त्ल करके जो लोग बेगुनाह हो गए !

कौन सुनाएगा तुझको अब कहानी मेरी,
अब तो मेरे क़ासिद भी बेजुबान हो गए !

चराग़ों की तरह रात हम भर जलते रहे,
मज़लूम-ए-तजाहुल हर सुबह हो गए !

|||फ़राज़|||


बेनियाज़= Independent, Carefree.
इल्ज़ाम= Blame
मसअला= Matter, Problem. 
मिसाल= Example, Instance, Model.
तालीमगाह= Seminary.
लौ= Candle flame, Ardent desire.
फ़ना= Destruction. 
राज़-ए-ज़मीर= Secret of Heart/Conscience/Mind.
बेरिदा=Uncover.
क़त्ल= Murder.
क़ासिद= Messenger.
मज़लूम= Victimised, One who is treated wrongfully or unjustly.
तजाहुल= Ignorance. 

रविवार, 27 अगस्त 2017

बेमुरव्वत!!!

बेमुरव्वत मैं भी ज़रा हो जाऊं,
क्यूँ न अब मैं भी ख़फ़ा हो जाऊं!

तू बेनियाज़ है अब मेरी मरीज़ी से,
बेग़रज़ मैं तुझसे इस दफ़ा हो जाऊं!

तुझसा कोई हुनर मुझको भी अता हो,
क़त्ल भी करूँ और बेगुनाह हो जाऊं!

तेरे क़िरदार का हर ऐब नुमाया होगा,
सर-ए-बाज़ार अगर मैं बेरिदा हो जाऊं!

वो तग़ाफ़ुल न करेगा ख़बर है हमको,
'फ़राज़' किसके लिए मैं फ़ना हो जाऊं!

मेरे ऐब को भी लोग मेरी अदा समझें,
मुकम्मल मैं कुछ इस तरह हो जाऊं!

क़फ़स में तो हूँ मगर परिंदा तो नहीं,
मैं बाज़ुबां हूँ तो कैसे बेज़ुबां हो जाऊं!

|||फ़राज़|||

बेमुरव्वत=Unkind, Uncivil, Inhuman.
बेनियाज़= Carefree
मरीज़ी= Sickness, Unwell.
बेग़रज़=Uninterested.
अता= Gift, Giving
क़िरदार= Character
ऐब=Defect, Imperfection
नुमाया= Apparent, Visible.
सर-ए-बाज़ार= In public, Openly.
बेरिदा=Uncover
तग़ाफ़ुल=Negligence
फ़ना=Destroy
क़फ़स=Cage, Prison
बाज़ुबां= One who can speak
बेज़ुबां= Speechless, Voiceless