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रविवार, 27 अगस्त 2017

बेमुरव्वत!!!

बेमुरव्वत मैं भी ज़रा हो जाऊं,
क्यूँ न अब मैं भी ख़फ़ा हो जाऊं!

तू बेनियाज़ है अब मेरी मरीज़ी से,
बेग़रज़ मैं तुझसे इस दफ़ा हो जाऊं!

तुझसा कोई हुनर मुझको भी अता हो,
क़त्ल भी करूँ और बेगुनाह हो जाऊं!

तेरे क़िरदार का हर ऐब नुमाया होगा,
सर-ए-बाज़ार अगर मैं बेरिदा हो जाऊं!

वो तग़ाफ़ुल न करेगा ख़बर है हमको,
'फ़राज़' किसके लिए मैं फ़ना हो जाऊं!

मेरे ऐब को भी लोग मेरी अदा समझें,
मुकम्मल मैं कुछ इस तरह हो जाऊं!

क़फ़स में तो हूँ मगर परिंदा तो नहीं,
मैं बाज़ुबां हूँ तो कैसे बेज़ुबां हो जाऊं!

|||फ़राज़|||

बेमुरव्वत=Unkind, Uncivil, Inhuman.
बेनियाज़= Carefree
मरीज़ी= Sickness, Unwell.
बेग़रज़=Uninterested.
अता= Gift, Giving
क़िरदार= Character
ऐब=Defect, Imperfection
नुमाया= Apparent, Visible.
सर-ए-बाज़ार= In public, Openly.
बेरिदा=Uncover
तग़ाफ़ुल=Negligence
फ़ना=Destroy
क़फ़स=Cage, Prison
बाज़ुबां= One who can speak
बेज़ुबां= Speechless, Voiceless