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शुक्रवार, 28 सितंबर 2018

चले गए

वादों को, इरादों को भुला के चले गए,
हंसती हुई आँखों को रुला के चले गए !

जाते हुए तुमने कोई क़र्ज़ा नहीं रखा,
इल्ज़ाम सारे हमपे लगा कर चले गए !

क़दमों के निशानात भी छोड़े नहीं तुमने,
रास्ता भी उस सफ़र का मिटा के चले गए !

कुछ यूँ गए कि लौट के न आये फ़िर कभी,
एक मोड़ पे इन आँखों को बिठा के चले गए !

'अल्फ़ाज़जिन्हें समझे थे नाख़ुदा अपना,
मेरा पता सैलाब को बता के चले गए !

||| अल्फ़ाज़ |||

क़र्ज़ा = Loan, Debt
इल्ज़ाम = Blame, Accusation
क़दम = Foot
निशानात = Traces, Signs
सफ़र = Journey
नाख़ुदा = Boatman, Sailor, The Master Or Commander Of A Ship
सैलाब= A Flood, Deluge, Inundation, Torrent

मंगलवार, 21 अगस्त 2018

याद


आँखें ही नहीं, दिल भी हल्का हो जायेगा,
ये अश्क़ बहते हैं तो बह जाने दीजिये !

जितना रोकोगे, वो याद उतना आएगा,
वो याद आता है तो याद आने दीजिये !

सुना है कि अब उसे फ़र्क़ नहीं पड़ता,
छोड़िये, अब आप भी जाने दीजिये !

उसके नाम के साथ मेरा नाम तो आ जाता है,
लोग इल्ज़ाम लगते हैं तो लगाने दीजिये !

अब तो रूठने में ही मज़ा आने लगा है,
वो मनाता है तो अब मनाने दीजिये !

लौट आएगा अगर वो अपना होगा,
'फ़राज़' वो जाता है तो उसे जाने दीजिये !

||| फ़राज़ |||

अश्क़= Tears
फ़र्क़= Difference
इल्ज़ाम= Blame

गुरुवार, 16 अगस्त 2018

ज़माना

कुछ ख़बरें आज भी ख़बरें हैं,
यूँ तो अख़बार पुराना है !

सबके हिस्से थोड़ा थोड़ा,
ग़म का एक ख़ज़ाना है !

आसान है मशवरा देना
पर मुश्किल हाथ बंटाना है !

सच्चा तो बस मेरा दिल है,
झूठा ये सारा ज़माना है !

शम्माओं को इल्ज़ाम न दो,
उनका तो काम जलाना है !

मेरा दुश्मन मुझमें ही था,
ढूँढा तो सारा ज़माना है !

रोज़ ही याद आ जाता है,
कि क्या-क्या मुझे भुलाना है !

एक ग़ज़ल छलकना वाजिब है,
हाथों में एक पैमाना है !

कहने दे जो ये कहता है,
ये तो 'फ़राज़' ज़माना है !

||| फ़राज़ |||

ख़बर= News
ग़म= Sorrow, Grief
ख़ज़ाना= Treasure
मशवरा= Advice
ज़माना= World, Era
शम्मा= Candle
इल्ज़ाम= Blame
वाजिब= Necessary

पैमाना= Goblet, Wine-Cup

सोमवार, 25 जून 2018

जुनूँ !!!

कोई और जुनूँ न हुआ इस शिद्दत की तरह,
तू लगने लगा है मुझको मोहब्बत की तरह !

माना कि मैं बुरा हूँ तो चल बुरा ही सही,
मुझे न छोड़ पायेगा तू बुरी आदत की तरह !

तेरे नाज़-नख़रों के सवाली और भी होंगे,
कौन चाहेगा तुझे मेरी चाहत की तरह !

तेरी गर्दिश मेरे दिल में है धड़कन जैसी,
तेरा एहसास इतवार की फ़ुर्सत की तरह !

बेचैनियाँ यूँ तो हैं दो जहान की मुझको,
तू पुर-सुकूँ किसी नेक सोहबत की तरह !

तेरे ख़याल से मन में बहार आ जाती है,
तू साथ है तो ज़िन्दगी है जन्नत की तरह !

यूँ तो ‘फ़राज़’ ने कमाए हैं इल्ज़ाम कई,
कभी तू भी तो मुझपे आ किसी तोहमत की तरह !

 ||| फ़राज़ |||

जुनूँ= Frenzy/ Madness/ Infatuation
तरह= Manner, Mode
शिद्दत= Force, Vehemence, Severity
नाज़-नख़रों=  Pride, Grace And Tantrums
सवाली= A Beggar, A Petitioner
गर्दिश= Rotation, Circulation
एहसास= Feeling
फ़ुर्सत= Leisure, Rest
बेचैनियाँ= Restlessness.
जहान= World
पुर-सुकूँ= Peaceful
नेक= Good, Virtuous.
सोहबत= Company
बहार= Spring, Bloom
इल्ज़ाम= Blame
तोहमत= Allegation, Accusation

बुधवार, 20 जून 2018

डर !!!

तेरे ख़्वाब के पूरा होने से डर जाता हूँ,
मैं फ़िर से अधूरा होने से डर जाता हूँ !

परछाइयाँ भी तो साथ छोड़ जाती हैं,
मैं अब अँधेरा होने से डर जाता हूँ !

सच बात कहता हूँ तो लोग रूठ जाते हैं,
आजकल आईना होने से डर जाता हूँ !

बे-वजह ही मुझपे इल्ज़ाम लग जाते हैं,
अब तो मुसलमां होने से डर जाता हूँ !

जानता हूँ कि बिछड़ने का दर्द क्या है,
लोगों के अपना होने से डर जाता हूँ !

तुम वो नहीं रहे जो तुम हुआ करते थे,
मैं फ़िर से तुम्हारा होने से डर जाता हूँ !

कोई भी तो दिल से अच्छा नहीं कहता,
इस दौर का हुक्मराँ होने से डर जाता हूँ !

अपनी कलम पे बंदिश मैं लगा नहीं सकता,
मैं अपने बे-ज़बां होने से डर जाता हूँ !

अख़बार की सुर्ख़ियोँ जब मैं पढ़ता हूँ,
'फ़राज़' मैं अच्छा होने से डर जाता हूँ !

||| फ़राज़ |||

ख़्वाब = Dream
बे-वजह = Without Cause
इल्ज़ाम = Blame
मुसलमां = The Muslim
दौर = Era, Age
हुक्मराँ = Ruler
बंदिश = Closure, Stoppage
बे-ज़बां = Tongue less, Speechless.
सुर्ख़ियाँ = Headlines.

सोमवार, 4 जून 2018

अश्क़ !!!

दर्द-ए-दिल ग़ज़ल में बयाँ करके रो लिए,
तन्हाई को फ़िर दास्ताँ सुना करके रो लिए !

किसको सुनाएँ दर्द कि सब ग़ैर हो गए हैं,
तकलीफ़ सारी ख़ुद को सुना करके रो लिए !

तेरा नाम को न सुन लें कहीं ये ज़माने वाले,
सीने में हिचकियों को दबा करके रो लिए !

शिकवा तेरी जफ़ा का, करते भी हम तो किस से,
इल्ज़ाम सारे ख़ुद पे लगा करके रो लिए !

की भूलने की कोशिश, और याद करके रोये,
हर बार ख़ुद को ही आज़मा करके रो लिए !

मज़मून जिनका दिल सेमिटता नहीं मिटाए,
तेरे उन्ही ख़तों को जला करके रो लिए !

यूँ भी हुआ कि एक दिन सौदाई हो गए,
ख़ुद को ही ख़ुद हँसाया और हंसा करके रो लिए !

रोये हम इस क़दर कि आँसू भी न बचे जब,
अपने लहू को अश्क़ बना करके रो लिए !

जुर्म-ए-वफ़ा की हमने ख़ुद को सज़ा ये दी है,
ख़ुद को ही ख़ुद का मुजरिम बता करके रो लिए !

तमाशा मेरी वफ़ा का न देख ले ये दुनिया,
तकिये में अपने मुँह को छुपा करके रो लिए !

जागे जो नींद से तो जाना की ख़्वाब था वो,
पहलू में हम तुझे न पा करके रो लिए !

रोता था मैं तो मुझपे हँसते थे ये उजाले,
'फ़राज़हम चराग़ों को बुझा कर के रो लिए !

||| फ़राज़ |||

दर्द-ए-दिल= Heart's Grief, Heartache, Grief, Sorrow, Anguish
बयाँ= Description, Narrative, Statement
तन्हाई= Loneliness, Privacy, Solitude
दास्ताँ= Story, Fable, Tale
ग़ैर= Stranger, Unacquainted
तकलीफ़= Pain, Affliction
शिकवा= Complaint, Reproach
जफ़ा = Oppression, Injust
इल्ज़ाम= Blame, Accusation
आज़मा= Try, Test
मज़मून= Article, Subject Matter.
सौदाई= Insane, Mad
क़दर= Amount
अश्क़= Tears
जुर्म-ए-वफ़ा= Guilty/Crime Of Faithfulness/Loyalty
बारहा= Many Times
मुजरिम= Criminal
तमाशाShow, Exhibition,
वफ़ा= Fidelity, Faithfulness
पहलू= Side, Flank
ख़्वाब= Dream
चराग़= An Oil Lamp.

सोमवार, 21 मई 2018

तसव्वुर-ए-ग़ज़ल !!!

तू न आये, मुझपे तेरा इल्ज़ाम तो आये,
मेरी दीवानगी मेरे भी कुछ काम तो आये !

तू दुआ न सही, बद-दुआ ही दे दे मुझे,
कि तेरे लबों पर मेरा नाम तो आये !

मुझे भी दीवाना कहें, लोग पत्थर मारें,
तेरी आशिक़ी में मेरा वो मक़ाम तो आये !

अभी होश में हूँ मैं, कुछ समझ नहीं आता,
याद सब आ जाएगा, पहले जाम तो आये !

दवा देना है तो दे वरना ज़हर ही दे दे,
मरीज़-ए-इश्क़ को अब आराम तो आये !

कई राज़ मुन्तज़िर हैं कहे जाने को,
जवाब सारे तैयार हैं मगर सलाम तो आये !

तमाशा इश्क़ का हो तो सारी दुनिया देखे,
मेरी तसव्वुर-ए-ग़ज़ल सर-ए-आम तो आये !

मेरा नाम ले के तुझको कोई बदनाम कर दे,
'फ़राज़' के नाम के साथ तेरा नाम तो आये !

||| फ़राज़ |||

इल्ज़ाम= Blame, Accusation
दीवानगी= Madness, Lunacy, Insanity
बद-दुआ= Curse
लब= Lips
आशिक़ी= Love, State Of Being In Love Courtship
मक़ाम= Place, Position
होश= Sense
जाम= Glass Of Wine
मरीज़-ए-इश्क़= Sick Of Love
राज़= Secret
मुन्तज़िर= Expectant, One Who Waits
सलाम= Salutation
तसव्वुर-ए-ग़ज़ल= Imagination/ Contemplation Of An Ode/ Gazal
सर-ए-आम= In Public
बदनाम= Defame