तू न आये, मुझपे तेरा इल्ज़ाम तो आये,
मेरी दीवानगी मेरे भी कुछ
काम तो आये !
तू दुआ न सही, बद-दुआ ही दे दे मुझे,
कि
तेरे लबों पर मेरा नाम
तो आये !
मुझे भी दीवाना कहें, लोग पत्थर मारें,
तेरी आशिक़ी में मेरा वो मक़ाम तो आये !
अभी होश में हूँ मैं, कुछ समझ नहीं आता,
याद
सब आ जाएगा,
पहले जाम तो आये !
दवा देना है तो दे वरना ज़हर ही दे दे,
मरीज़-ए-इश्क़ को अब आराम
तो आये !
कई राज़ मुन्तज़िर हैं कहे जाने को,
जवाब
सारे तैयार हैं मगर सलाम तो आये !
तमाशा इश्क़ का हो तो सारी दुनिया देखे,
मेरी तसव्वुर-ए-ग़ज़ल सर-ए-आम तो आये !
मेरा नाम ले के तुझको कोई बदनाम कर दे,
'फ़राज़' के नाम के
साथ तेरा नाम तो आये !
||| फ़राज़ |||
इल्ज़ाम= Blame, Accusation
दीवानगी= Madness, Lunacy, Insanity
बद-दुआ=
Curse
लब= Lips
आशिक़ी= Love, State Of Being In Love Courtship
मक़ाम= Place, Position
होश= Sense
जाम= Glass Of Wine
मरीज़-ए-इश्क़= Sick Of Love
राज़= Secret
मुन्तज़िर= Expectant, One Who Waits
सलाम= Salutation
तसव्वुर-ए-ग़ज़ल= Imagination/ Contemplation Of An Ode/ Gazal
सर-ए-आम= In Public
बदनाम=
Defame
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें