क्या
ख़ूब बला है ये आतिश-ए-इश्क़,
कि जलने
में भी मज़ा, और जलाने में भी !
कहें तो कैसे कहें कि बात है दिल की,
जिसे
कहने में भी मज़ा और छुपाने में भी !
मज़ा इसमें भी है कि उनको जलाया जाए,
कि
जिनसे रूठने में भी मज़ा, जिनको मनाने में भी !
दिल को खिलौना ही समझ कर खेल लीजिये,
आपसे तो
जीतने में भी मज़ा, और हार जाने में भी !
तेरे इश्क़ की हर शर्त है मंज़ूर हमको,
जिन्हें
तोड़ने में भी मज़ा और निभाने में भी !
ये इश्क़ का नशा है, हर हाल में मज़ा है,
है दिल्लगी में भी मज़ा और दिल के लगाने में भी !
दिल के सौदे में कभी 'फ़राज़' का ख़सारा न हुआ,
है मिलन
में भी मज़ा, और बिछड़ जाने में भी !
||| फ़राज़ |||
आतिश-ए-इश्क़= Fire Of Love
शर्त= Condition,
मंज़ूर= Accept
हाल= State, Condition,
दिल्लगी= Amusement, Merriment
ख़सारा= Loss
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