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गुरुवार, 16 अगस्त 2018

ज़माना

कुछ ख़बरें आज भी ख़बरें हैं,
यूँ तो अख़बार पुराना है !

सबके हिस्से थोड़ा थोड़ा,
ग़म का एक ख़ज़ाना है !

आसान है मशवरा देना
पर मुश्किल हाथ बंटाना है !

सच्चा तो बस मेरा दिल है,
झूठा ये सारा ज़माना है !

शम्माओं को इल्ज़ाम न दो,
उनका तो काम जलाना है !

मेरा दुश्मन मुझमें ही था,
ढूँढा तो सारा ज़माना है !

रोज़ ही याद आ जाता है,
कि क्या-क्या मुझे भुलाना है !

एक ग़ज़ल छलकना वाजिब है,
हाथों में एक पैमाना है !

कहने दे जो ये कहता है,
ये तो 'फ़राज़' ज़माना है !

||| फ़राज़ |||

ख़बर= News
ग़म= Sorrow, Grief
ख़ज़ाना= Treasure
मशवरा= Advice
ज़माना= World, Era
शम्मा= Candle
इल्ज़ाम= Blame
वाजिब= Necessary

पैमाना= Goblet, Wine-Cup