paimana लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
paimana लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 16 अगस्त 2018

ज़माना

कुछ ख़बरें आज भी ख़बरें हैं,
यूँ तो अख़बार पुराना है !

सबके हिस्से थोड़ा थोड़ा,
ग़म का एक ख़ज़ाना है !

आसान है मशवरा देना
पर मुश्किल हाथ बंटाना है !

सच्चा तो बस मेरा दिल है,
झूठा ये सारा ज़माना है !

शम्माओं को इल्ज़ाम न दो,
उनका तो काम जलाना है !

मेरा दुश्मन मुझमें ही था,
ढूँढा तो सारा ज़माना है !

रोज़ ही याद आ जाता है,
कि क्या-क्या मुझे भुलाना है !

एक ग़ज़ल छलकना वाजिब है,
हाथों में एक पैमाना है !

कहने दे जो ये कहता है,
ये तो 'फ़राज़' ज़माना है !

||| फ़राज़ |||

ख़बर= News
ग़म= Sorrow, Grief
ख़ज़ाना= Treasure
मशवरा= Advice
ज़माना= World, Era
शम्मा= Candle
इल्ज़ाम= Blame
वाजिब= Necessary

पैमाना= Goblet, Wine-Cup

शनिवार, 17 जून 2017

अभी ताज़ा है ज़ख्म, थोड़ा अभी सह लेने दो..

अभी ताज़ा है ज़ख्म,
थोड़ा अभी सह लेने दो..
आज मुझे ज़रा देर चुप रह लेने दो..

अभी मैं बिखरा हूँ,  
कुछ वक़्त में सिमट जाऊँगा..
अभी सोया हूँ,
जब जागूँगा तो निखर जाऊँगा..
मेरे हालात से तुम न परेशान होना..
मैं हूँ दरिया,
समंदर नहीं, जो ठहर जाऊँगा..
अभी ताज़ा है ज़ख्म,
थोड़ा अभी सह लेने दो..
आज मुझे ज़रा देर चुप रह लेने दो..

अभी बाक़ी हैं हवास,
कोई बात न मैं समझूंगा..
एक पैमाना और कर दूँ ख़ाली,
तो कुछ समझूंगा..
अभी ज़िन्दगी के कुछ घूँट
भी हैं पीना बाक़ी..
जो कुछ बूँदें ही मिल जाएँ,
तो ग़नीमत समझूंगा..

मुझसे ख़्वाबों में भी तुम
न कोई रिश्ता रखना..
इतना है कहना,
इतना ही बस कह लेने दो..
अभी ताज़ा है ज़ख्म,
थोड़ा अभी सह लेने दो..
आज मुझे ज़रा देर चुप रह लेने दो...

आज भी याद है मुझको
जब तुमने कुछ कहा भी न था..
तुम ही आँखों में,
ख़्वाबों में, मेरी ज़िन्दगी में थे..
आज भी याद हैं ठिकाने
तुमसे मिलने के..
आज भी कानों में
पहली सी सदा आती है..
ये, और कुछ और बातें,
जो अधूरी रह गयीं..
आज फिर ये बातें,
मुझे खुद से कह लेने दो..
अभी ताज़ा है ज़ख्म,
थोड़ा अभी सह लेने दो..
आज मुझे ज़रा देर चुप रह लेने दो...


फ़राज़

बुधवार, 21 सितंबर 2016

अभी ताज़ा है ज़ख्म, थोड़ा अभी सह लेने दो..



आज मुझे अपनी गहराइयों में छुप के रह लेने दो..
आज मुझे ज़रा देर चुप रह लेने दो..

अभी मैं बिखरा हूँ, कुछ वक़्त में सिमट जाऊँगा..
अभी सोया हूँ, जब जागूँगा तो निखर जाऊँगा..
मेरे हालात से तुम न परेशान न होना..
मैं हूँ दरिया, समंदर नहीं, जो ठहर जाऊँगा..
अभी ताज़ा है ज़ख्म, थोड़ा अभी सह लेने दो..
आज मुझे ज़रा देर चुप रह लेने दो..

अभी बाक़ी हैं हवास, कोई बात न मैं समझूंगा..
एक पैमाना और कर दूँ ख़ाली, तो कुछ समझूंगा..
अभी ज़िन्दगी के कुछ घूँट भी हैं पीना बाक़ी..
जो कुछ बूँदें ही मिल जाएँ तो ग़नीमत समझूंगा..

मुझसे ख़्वाबों में भी ना कोई रिश्ता रखना..
इतना है कहना, इतना ही बस कह लेने दो..
अभी ताज़ा है ज़ख्म, थोड़ा अभी सह लेने दो..
आज मुझे ज़रा देर चुप रह लेने दो...

आज भी याद है जब तुमने कुछ कहा भी न था..
तुम ही आँखों में, ख़्वाबों में, मेरी ज़िन्दगी में थे..
आज भी याद हैं ठिकाने तुझसे मिलने के..
आज भी कानों में तेरी सी सदा आती है..
ये, और कुछ और बातें, जो अधूरी रह गयीं..
आज फिर ये बातें मुझे खुद से कह लेने दो..
अभी ताज़ा है ज़ख्म, थोड़ा अभी सह लेने दो..

आज मुझे ज़रा देर चुप रह लेने दो...