कुछ ख़बरें आज भी ख़बरें हैं,
यूँ तो अख़बार पुराना है !
सबके हिस्से थोड़ा थोड़ा,
ग़म का एक ख़ज़ाना है !
आसान है मशवरा देना,
पर मुश्किल हाथ बंटाना है !
सच्चा तो बस मेरा दिल है,
झूठा ये सारा ज़माना है !
शम्माओं को इल्ज़ाम न दो,
उनका तो काम जलाना है !
मेरा दुश्मन मुझमें ही था,
ढूँढा तो सारा ज़माना है !
रोज़ ही याद आ जाता है,
कि क्या-क्या मुझे भुलाना है !
एक ग़ज़ल छलकना वाजिब है,
हाथों में एक पैमाना है !
कहने दे जो ये कहता है,
ये तो 'फ़राज़' ज़माना
है !
||| फ़राज़ |||
ख़बर= News
ख़बर= News
ग़म= Sorrow, Grief
ख़ज़ाना= Treasure
मशवरा= Advice
ज़माना= World, Era
शम्मा= Candle
इल्ज़ाम= Blame
वाजिब= Necessary
पैमाना= Goblet, Wine-Cup