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शुक्रवार, 28 सितंबर 2018

चले गए

वादों को, इरादों को भुला के चले गए,
हंसती हुई आँखों को रुला के चले गए !

जाते हुए तुमने कोई क़र्ज़ा नहीं रखा,
इल्ज़ाम सारे हमपे लगा कर चले गए !

क़दमों के निशानात भी छोड़े नहीं तुमने,
रास्ता भी उस सफ़र का मिटा के चले गए !

कुछ यूँ गए कि लौट के न आये फ़िर कभी,
एक मोड़ पे इन आँखों को बिठा के चले गए !

'अल्फ़ाज़जिन्हें समझे थे नाख़ुदा अपना,
मेरा पता सैलाब को बता के चले गए !

||| अल्फ़ाज़ |||

क़र्ज़ा = Loan, Debt
इल्ज़ाम = Blame, Accusation
क़दम = Foot
निशानात = Traces, Signs
सफ़र = Journey
नाख़ुदा = Boatman, Sailor, The Master Or Commander Of A Ship
सैलाब= A Flood, Deluge, Inundation, Torrent

मंगलवार, 25 सितंबर 2018

मैं

अच्छा हूँ,  कुछ बुरा हूँ,
मैं भी तेरी तरह हूँ  !

किस बात का तकब्बुर,
मिट्टी का मैं बना हूँ !

मेरी तड़प क्या जानो !
पिंजरे का परिंदा हूँ !

डर तो है ज़िन्दगी का,
कब मौत से डरा हूँ !

रिश्तों की डोर की मैं,
नाज़ुक सी एक गिरह हूँ ! 

हर ज़ख़्म का हूँ मरहम,
हर रोग की दवा हूँ !

क्यूँ हो भँवर की परवाह,
मैं खुद का नाख़ुदा हूँ !

टूटा है जब से ये दिल,
मैं ख़ुद का हुक्मराँ हूँ !

पुरवाई का हूँ झौंका,
मौसम मैं इक नया हूँ !

ऊपर को ही उठूँगा
,
'अल्फ़ाज़मैं धुआँ हूँ !

||| अल्फ़ाज़ |||

तकब्बुर= Pride, Arrogance, Haughtiness
परिंदा= Bird
नाज़ुक= Delicate, Thin
गिरह= A Knot, A Joint, 
मरहम= Remedy, Ointment
भँवर= Whirlpool Vortex
परवाह= Care, Concern
नाख़ुदा= Boatman, Sailor, The Master/Commander Of A Ship
हुक्मराँ= Ruler

सोमवार, 15 जनवरी 2018

ख़ैर-ख़बर

हमने समझा था कि दिल संभल गया होगा,
जाने क्या बात है कि आँख भर आती है !

न पूछ क़िस्सा तू मेरी मोहब्बत का,
चोट सीने की पुरानी सी उभर आती है !

पलकों पे छोड़ जाती है भीगे लम्हें,
दिल में जब यादों की लहर आती है !

माना कि तू मेरा कोई नहीं लगता,
अच्छा लगता है जब ख़ैर-ख़बर आती है !

कि वो क़ुर्बत नहीं, महज़ तिजारत है,
वो मोहब्बत, जो शर्तों पर आती है !

नाख़ुदा का किरदार भी पता चल जाता है,
कश्तियाँ 'फ़राज़' जब बीच भंवर आती हैं !

||| फ़राज़ |||

क़िस्सा= Tale, Story.
ख़ैर-ख़बर= News/ Information of wellness/goodness.
क़ुर्बत= vicinity, nearness.
महज़= Merely, Only
तिजारत= Trade, Commerce.
शर्त= Condition, Term, Stipulation.
नाख़ुदा= Boatman, Sailor, Captain/Commander of the ship.
किरदार= Character.
कश्ती= Boat.
भंवर= whirlpool vertex.

गुरुवार, 30 नवंबर 2017

वो हमारा कब था !

दिल्लगी का इल्ज़ाम भला उसको क्यूँ दें,
हम ही तो उसके थे वो हमारा कब था !

जिस नाख़ुदा के हवाले थी कश्ती अपनी,
वो तो एक मौज था, वो किनारा कब था !

जिसके तसव्वुर पर हम दिल हार बैठे थे,
उसकी ज़ुल्फ़ों को अभी हमने संवारा कब था !

उसका ज़िक्र तो सिर्फ़ धड़कन से किया था,
उस नाम को होंठों से अभी पुकारा कब था !

अभी नज़र भरके देखा भी न था उसको,
दिल में उस चाँद से चेहरे को उतारा कब था !

दीदार की ख़ातिर सिर्फ़ हम ही बेक़रार न थे,
हमको देखे बिना उसका भी गुज़ारा कब था !

एक दुश्मन-ए-जां से मानूस हो बैठा है,
इतना मजबूर ये दिल या ख़ुदारा कब था !

उससे तो हर तक़ाज़ा अब महशर में होगा,
क़र्ज़ मेरी वफ़ाओं का उसने उतारा कब था !

कैसे जीता रहा भला तू मुझसे जुदा हो के,
एक लम्हा भी तो मेरे बिना गवारा कब था !

तूने तो दिल हार कर मैंने जीता था उसको,
'फ़राज़' दिल के सौदे में कोई ख़सारा कब था !


|||फ़राज़|||


दिल्लगी= Amusement, Merriment
इल्ज़ाम= Blame, Acquisition.
नाख़ुदा= Boatman, Sailor, Master of the ship.
कश्ती= Boat
मौज= Wave.
तसव्वुर= Imagination, Contemplation, 
ज़िक्र= Narration, Remembrance, Talk.
दीदार= Appearance, Sight.
ख़ातिर= For the sake.
बेक़रार= Restless
गुज़ारा= Passage.
दुश्मन-ए-जां= Enemy of the heart, Beloved.
मानूस= Intimate, Associate, Friendly,
ख़ुदारा= Oh God.
तक़ाज़ा= Demand, Urge, pressing settlement of the claim.
महशर= Tumult, Day of resurrection, The Place of rising and assembling after death.
वफ़ा= Fidelity, Faithfulness.
गवारा= Tolerable, Acceptable, Bearable.
ख़सारा= Loss.

रविवार, 26 नवंबर 2017

नाख़ुदा !!!

नदामत नहीं फ़राज़ फ़ितरत उसकी,
तूने इल्ज़ाम ही उसपर बेवजह रखा !
देख वो ही चला गया लूट कर तुझको,
दरवाज़ा जिसके लिए था खुला रखा !

ज़हन यूँ तो ज़िम्मेदार हो चला है,
दिल को फ़िर भी मैंने मनचला रखा !
मेहमानदारियां दिल में तो चला करती हैं,
ज़हन को अगरचे है मैंने तन्हा रखा !

तेरा ख़याल आया तो ग़ज़ल लिख दी,
यूँ अपने दिल को मैंने शादमां रखा !
तेरी आबरू की परवाह भी है मुझको,
तेरा नाम ग़ज़लों से अलाहिदा रखा !

रहबरों की परख नहीं आती मुझको,
एक रहज़न को था मैंने नाख़ुदा रखा !
चल तू ही दिल का इन्साफ़ कर दे,
इस दिल ने तेरा नाम है ख़ुदा रखा !

|||फ़राज़|||

नदामत= Regret, Shame, Repentance.
फ़ितरत= Nature
इल्ज़ाम= Blame, Acquisition, Allegation
बेवजह= without cause.
ज़हन= Mind.
तन्हा= Lonely, Alone.
अगरचे= Although
शादमां= Happy
आबरू= Dignity
अलाहिदा= Separate, Apart
रहबर= Guide
रहज़न= Robber.
नाख़ुदा= Master or commander of the ship, sailor, boatman.
इन्साफ़= Justice.