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मंगलवार, 25 सितंबर 2018

मैं

अच्छा हूँ,  कुछ बुरा हूँ,
मैं भी तेरी तरह हूँ  !

किस बात का तकब्बुर,
मिट्टी का मैं बना हूँ !

मेरी तड़प क्या जानो !
पिंजरे का परिंदा हूँ !

डर तो है ज़िन्दगी का,
कब मौत से डरा हूँ !

रिश्तों की डोर की मैं,
नाज़ुक सी एक गिरह हूँ ! 

हर ज़ख़्म का हूँ मरहम,
हर रोग की दवा हूँ !

क्यूँ हो भँवर की परवाह,
मैं खुद का नाख़ुदा हूँ !

टूटा है जब से ये दिल,
मैं ख़ुद का हुक्मराँ हूँ !

पुरवाई का हूँ झौंका,
मौसम मैं इक नया हूँ !

ऊपर को ही उठूँगा
,
'अल्फ़ाज़मैं धुआँ हूँ !

||| अल्फ़ाज़ |||

तकब्बुर= Pride, Arrogance, Haughtiness
परिंदा= Bird
नाज़ुक= Delicate, Thin
गिरह= A Knot, A Joint, 
मरहम= Remedy, Ointment
भँवर= Whirlpool Vortex
परवाह= Care, Concern
नाख़ुदा= Boatman, Sailor, The Master/Commander Of A Ship
हुक्मराँ= Ruler

रविवार, 16 जुलाई 2017

नादानियाँ !!!

साफ़ दिखती हैं तेरी हक़ीकत की सारी गिरहें,
आइनों से अपनी हस्ती छुपाया न कर !

ख़बरनवीस फिरते हैं हर कूचा-ओ-बाज़ार में,
राज़ दिल के तू सबसे बताया न कर !

अब तो कोई पत्थर भी नहीं उछालता तुझपर,
दिल-ए-नादाँ अब उसकी गली में जाया न कर !

तेरी नादानियों से वो हिफ़्ज़ हो गया तुझको,
वो और याद आएगाउसे भुलाया न कर !

लोग मरहम ही नहीं नमक भी लिए बैठे हैं,
ज़िक्र कभी उसका तू होंठों पे लाया न कर !

किसी और का हक़ है उसकी हर सांस पर,
कसम उसके नाम की अब तू खाया न कर !

कौन सुनता है ख़ामोशियाँ इस शोरशराबे में,
सब्र तू भी 'फ़राज़' इस क़दर आज़माया न कर !

||| फ़राज़ |||

गिरहें= Knot, joints, knuckles. 

ख़बरनवीस= Journalists. 
कूचा-ओ-बाज़ार= Narrow street and Market.
दिल-ए-नादाँ= Innocent heart. Shortsighted, Improvident.
हिफ्ज़= Rote, Memory
शोरशराबे= Noises.

गुरुवार, 4 मई 2017

राब्ता !!!

कल रात तुम फ़िर आये थे,
ख़्वाब था शायद,
पर अच्छा था !

राब्ता ये ख़्वाबों का
जैसे बुलबुला सा पानी का !

तुम भी कुछ-कुछ नींद के जैसे हो,
एक बार रूठ जाते हो
तो फ़िर जल्दी नहीं आते हो!

मैं रोज़ बांधता हूँ
उम्मीद की एक गिरह ,
तुम दुनियादारी की दलीलें दे कर
खोल देते हो,
रिश्तों की सारी गिरहें !

ख़्वाबों में न आया करो,
कि अब ख़्वाब टूटने से
राब्ता भी टूट जाता है !

|||फ़राज़|||



राब्ता = Contact.
गिरह= Knot, Joint.
दुनियादारी= Worldliness.
दलीलें= Excuses.