कल रात तुम फ़िर आये थे,
ख़्वाब था शायद,
पर अच्छा था !
राब्ता ये ख़्वाबों का
जैसे बुलबुला सा पानी का !
तुम भी कुछ-कुछ नींद के जैसे हो,
एक बार रूठ जाते हो
तो फ़िर जल्दी नहीं आते हो!
मैं रोज़ बांधता हूँ
उम्मीद की एक गिरह ,
तुम दुनियादारी की दलीलें दे कर
खोल देते हो,
रिश्तों की सारी गिरहें !
ख़्वाबों में न आया करो,
कि अब ख़्वाब टूटने से
राब्ता भी टूट जाता है !
|||फ़राज़|||
|||फ़राज़|||
राब्ता =
Contact.
गिरह=
Knot, Joint.
दुनियादारी= Worldliness.
दलीलें= Excuses.
दलीलें= Excuses.