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मंगलवार, 25 सितंबर 2018

मैं

अच्छा हूँ,  कुछ बुरा हूँ,
मैं भी तेरी तरह हूँ  !

किस बात का तकब्बुर,
मिट्टी का मैं बना हूँ !

मेरी तड़प क्या जानो !
पिंजरे का परिंदा हूँ !

डर तो है ज़िन्दगी का,
कब मौत से डरा हूँ !

रिश्तों की डोर की मैं,
नाज़ुक सी एक गिरह हूँ ! 

हर ज़ख़्म का हूँ मरहम,
हर रोग की दवा हूँ !

क्यूँ हो भँवर की परवाह,
मैं खुद का नाख़ुदा हूँ !

टूटा है जब से ये दिल,
मैं ख़ुद का हुक्मराँ हूँ !

पुरवाई का हूँ झौंका,
मौसम मैं इक नया हूँ !

ऊपर को ही उठूँगा
,
'अल्फ़ाज़मैं धुआँ हूँ !

||| अल्फ़ाज़ |||

तकब्बुर= Pride, Arrogance, Haughtiness
परिंदा= Bird
नाज़ुक= Delicate, Thin
गिरह= A Knot, A Joint, 
मरहम= Remedy, Ointment
भँवर= Whirlpool Vortex
परवाह= Care, Concern
नाख़ुदा= Boatman, Sailor, The Master/Commander Of A Ship
हुक्मराँ= Ruler

रविवार, 9 सितंबर 2018

दर्द के मारे

जो दर्द के मारे होते हैं,
हमदर्द हमारे होते हैं !

जब भंवर में कश्ती आती है,
तिनको के सहारे होते हैं !

ये अश्क हैं दिल का ज़ाइक़ा,
मीठे कभी खारे होते हैं !

जब इश्क़ किसी से होता है,
गर्दिश में सितारे होते हैं !

लहरों का ठिकाना कोई नहीं,
कश्ती के किनारे होते हैं !

वो जीत नहीं सकते दुनिया,
जो खुद से हारे होते हैं !

दिल में अगर हो कोई जुनूँ,
आँखों में शरारे होते हैं !

'फ़राज़नज़र बना के रख,
क़िस्मत के इशारे होते हैं !

||| फ़राज़ ||| 

हमदर्द= A Sympathizer, A Fellow, Sufferer Partner In Adversity
भंवर= Vortex, Whirlpool
अश्क= Tears
ज़ाइक़ा= Flavor, Sense Of Taste, Savor
खारा= Salty, Brackish
गर्दिश= Revolution, Circulation, Misfortune
कश्ती= A Boat, A Ship,
किनारा= Coast, Sea-Shore, Bank
जुनूँ= Frenzy/ Madness/ Infatuation
शरारा= Spark Of Fire, A Flash, A Gleam
क़िस्मत= Fate, Fortune, Destiny
इशारा= Gesture, Sign, Hint

बुधवार, 13 जून 2018

सफ़र !!!

कभी धूप का सफ़र, तो कभी छाँव का सफ़र,
एक तलातुम से झगड़ती मेरी नाव का सफ़र !

पा के मंज़िल को भी सफ़र में हम हैं
ख़त्म होता नहीं इश्क़ की राहों का सफ़र !

मेरे दर्द से तकलीफ़ कभी उनको भी हो,
कभी उन तक भी तो पहुंचे मेरी आहों का सफ़र !

वो भंवर था हमने जिसको साहिल समझा,
अब तो जाँ पे बन आया है वफ़ाओं का सफ़र !

मेरे पैरों में बेड़ियाँ मेरे हालात की हैं,
वरना लम्बा तो नहीं यहाँ से मेरे गाँव का सफ़र !

ख़ुद को तलाशता हूँ मैं अह्ल-ए-नज़र,
आईना दिखलाता है निगाहों का सफ़र !

जबीं रोज़ पूछती है ख़ुदा से सजदा करके !
मुकम्मल कब होगा मेरी दुआओं का सफ़र !

चाहतें जन्नत की दिल में रखता है 'फ़राज़',
फ़िर भी करता है शब्-ओ-रोज़ गुनाहों का सफ़र !

||| फ़राज़ |||

सफ़र= Journey
तलातुम= Sea-Storm, High Tide, Upheaval
मंज़िल= Destination, Stage
तकलीफ़= Trouble, Difficulty
आहों= Sighs, Moans.
भंवर= Whirlpool Vortex
साहिल= The Sea-Shore, Coast, Bank, 
जाँ= Life, Soul
वफ़ा= Fidelity, Faithfulness.
बेड़ियाँ= Shackles, Chains
हालात= Circumstances, Condition
वरना= Else, Otherwise
तलाशता= Search, Investigation, Quest, 
अह्ल-ए-नज़र= People Of Vision
आईना= Mirror
जबीं= Forehead
सजदा= Bowing In Prayer So As To Touch The Ground With The Forehead
मुकम्मल= Complete, Perfect
दुआ= Prayer
चाहत= Affection, Appetite
जन्नत= Paradise
शब्-ओ-रोज़= Night And Day
गुनाह= Sin, Crime, Fault

सोमवार, 19 मार्च 2018

!!! वफ़ा-पैकर !!!

ख़ुदारा ये क्या माजरा हो गया,
वफ़ा-पैकर था जोबेवफ़ा हो गया !


इबादत के जैसी थी चाहत मेरी,
जिसको चाहा वही ख़ुदा हो गया !


क़त्ल करना तो ठहरी उनकी अदा,
मेरा आह भरना भी ख़ता हो गया !

तिनकों का भी सहारा क्या लीजिये,
भंवर ही जब ना-ख़ुदा हो गया !

सदमा कोई तेरे दिल को भी है,
तू यूँ ही नहीं बे-ज़बां हो गया !


उजालों में अकेला सा रहता हूँ मैं,
मेरा साया मुझसे जुदा हो गया !

ये शर्त इश्क़ में क्यूँ है 'फ़राज़',
वही कामिल हुआ जो फ़ना हो गया !

||| फ़राज़ |||

ख़ुदारा= God
माजरा= State, Incident, Condition, Happening
वफ़ा-पैकर= Mage/Embodiment Of Constancy, Loyalty Incarnate
बेवफ़ा= Faithless, Treacherous
इबादत= Prayers, Adoration
अदा= Coquetry, Gesture, Style
आह= Sigh, Moan
ख़ता= Mistake/ Fault
भंवर= Whirlpool Vortex
ना-ख़ुदा= Boatman, Sailor, The Master Or Commander Of A Ship
सदमा= A Shock, A Blow, Calamity, Injury
बे-ज़बां= Speechless, Dumb
शर्त= Condition, Term
कामिल= Perfect
फ़ना= Destruction/ Transitory

सोमवार, 15 जनवरी 2018

ख़ैर-ख़बर

हमने समझा था कि दिल संभल गया होगा,
जाने क्या बात है कि आँख भर आती है !

न पूछ क़िस्सा तू मेरी मोहब्बत का,
चोट सीने की पुरानी सी उभर आती है !

पलकों पे छोड़ जाती है भीगे लम्हें,
दिल में जब यादों की लहर आती है !

माना कि तू मेरा कोई नहीं लगता,
अच्छा लगता है जब ख़ैर-ख़बर आती है !

कि वो क़ुर्बत नहीं, महज़ तिजारत है,
वो मोहब्बत, जो शर्तों पर आती है !

नाख़ुदा का किरदार भी पता चल जाता है,
कश्तियाँ 'फ़राज़' जब बीच भंवर आती हैं !

||| फ़राज़ |||

क़िस्सा= Tale, Story.
ख़ैर-ख़बर= News/ Information of wellness/goodness.
क़ुर्बत= vicinity, nearness.
महज़= Merely, Only
तिजारत= Trade, Commerce.
शर्त= Condition, Term, Stipulation.
नाख़ुदा= Boatman, Sailor, Captain/Commander of the ship.
किरदार= Character.
कश्ती= Boat.
भंवर= whirlpool vertex.

बुधवार, 12 जुलाई 2017

एक सवाल !!!

मेरी लकीरों में तो तेरा नाम लिखा था कल तक,
ख़ंजर से आज लकीरें आख़िर ये मिटाता कौन है !

कोई रिश्ता नहीं बाक़ी फ़िर भी बाक़ी कुछ तो है,
ख़्वाब से रातों में आख़िर ये जगाता कौन है !

ये वादा तो तेरा ही था की बिछड़े तो मर जाएँगे,
आज उन वादों से आख़िर ये मुकर जाता कौन है !

अब तू ही बता कि क्यूँ न तुझको दुश्मन समझूँ,
बीच भंवर कश्तियों को छोड़ के जाता कौन है

मुझको यकीं है तेरे लौट के न आने का,
ग़लतियां करके भला दोहराता कौन है !

तू तो चाँद हुआ करता था मेरे आँगन का,
सितारे सफ़र के अब मुझे दिखलाता कौन है !

रिश्ता जिस्म का ही रहा होगा शायद,
रूहों को भला जुदा कर पाता कौन है !

वस्ल भी देख लिया फ़िराक़ भी देख लिया,
नज़्म बग़ैर तजुर्बा लिए लिख पाता कौन है !

||| फ़राज़ |||

वस्ल= Meeting, Union.
फिराक़= Separation, Absence, Departing.