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सोमवार, 19 मार्च 2018

!!! वफ़ा-पैकर !!!

ख़ुदारा ये क्या माजरा हो गया,
वफ़ा-पैकर था जोबेवफ़ा हो गया !


इबादत के जैसी थी चाहत मेरी,
जिसको चाहा वही ख़ुदा हो गया !


क़त्ल करना तो ठहरी उनकी अदा,
मेरा आह भरना भी ख़ता हो गया !

तिनकों का भी सहारा क्या लीजिये,
भंवर ही जब ना-ख़ुदा हो गया !

सदमा कोई तेरे दिल को भी है,
तू यूँ ही नहीं बे-ज़बां हो गया !


उजालों में अकेला सा रहता हूँ मैं,
मेरा साया मुझसे जुदा हो गया !

ये शर्त इश्क़ में क्यूँ है 'फ़राज़',
वही कामिल हुआ जो फ़ना हो गया !

||| फ़राज़ |||

ख़ुदारा= God
माजरा= State, Incident, Condition, Happening
वफ़ा-पैकर= Mage/Embodiment Of Constancy, Loyalty Incarnate
बेवफ़ा= Faithless, Treacherous
इबादत= Prayers, Adoration
अदा= Coquetry, Gesture, Style
आह= Sigh, Moan
ख़ता= Mistake/ Fault
भंवर= Whirlpool Vortex
ना-ख़ुदा= Boatman, Sailor, The Master Or Commander Of A Ship
सदमा= A Shock, A Blow, Calamity, Injury
बे-ज़बां= Speechless, Dumb
शर्त= Condition, Term
कामिल= Perfect
फ़ना= Destruction/ Transitory