तेरे ख़्वाब के
पूरा होने से डर जाता हूँ,
परछाइयाँ भी तो साथ छोड़ जाती हैं,
सच बात कहता हूँ तो लोग रूठ जाते हैं,
आजकल आईना होने से डर जाता हूँ !
बे-वजह ही मुझपे इल्ज़ाम लग
जाते हैं,
अब तो मुसलमां होने
से डर जाता हूँ !
जानता हूँ कि बिछड़ने का दर्द क्या है,
तुम वो नहीं रहे जो तुम हुआ करते थे,
कोई भी तो दिल से अच्छा नहीं कहता,
इस दौर का हुक्मराँ होने
से डर जाता हूँ !
अपनी कलम पे बंदिश मैं
लगा नहीं सकता,
अख़बार की सुर्ख़ियोँ जब
मैं पढ़ता हूँ,
'फ़राज़' मैं
अच्छा होने से डर जाता हूँ !
||| फ़राज़ |||
ख़्वाब = Dream
बे-वजह = Without Cause
इल्ज़ाम = Blame
मुसलमां = The Muslim
दौर = Era, Age
हुक्मराँ = Ruler
बंदिश = Closure, Stoppage
बे-ज़बां = Tongue less, Speechless.
सुर्ख़ियाँ = Headlines.