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बुधवार, 3 अक्टूबर 2018

माँ

ख़ुदारा और क्या माँगूँ, तेरी मुझपर इनायत है,
कि मेरे साथ माँ भी है, और माँ की दुआ भी है !

||| अल्फ़ाज़ |||

ख़ुदारा= Oh God
इनायत= Favor, Kindness

सोमवार, 19 मार्च 2018

!!! वफ़ा-पैकर !!!

ख़ुदारा ये क्या माजरा हो गया,
वफ़ा-पैकर था जोबेवफ़ा हो गया !


इबादत के जैसी थी चाहत मेरी,
जिसको चाहा वही ख़ुदा हो गया !


क़त्ल करना तो ठहरी उनकी अदा,
मेरा आह भरना भी ख़ता हो गया !

तिनकों का भी सहारा क्या लीजिये,
भंवर ही जब ना-ख़ुदा हो गया !

सदमा कोई तेरे दिल को भी है,
तू यूँ ही नहीं बे-ज़बां हो गया !


उजालों में अकेला सा रहता हूँ मैं,
मेरा साया मुझसे जुदा हो गया !

ये शर्त इश्क़ में क्यूँ है 'फ़राज़',
वही कामिल हुआ जो फ़ना हो गया !

||| फ़राज़ |||

ख़ुदारा= God
माजरा= State, Incident, Condition, Happening
वफ़ा-पैकर= Mage/Embodiment Of Constancy, Loyalty Incarnate
बेवफ़ा= Faithless, Treacherous
इबादत= Prayers, Adoration
अदा= Coquetry, Gesture, Style
आह= Sigh, Moan
ख़ता= Mistake/ Fault
भंवर= Whirlpool Vortex
ना-ख़ुदा= Boatman, Sailor, The Master Or Commander Of A Ship
सदमा= A Shock, A Blow, Calamity, Injury
बे-ज़बां= Speechless, Dumb
शर्त= Condition, Term
कामिल= Perfect
फ़ना= Destruction/ Transitory

शनिवार, 3 मार्च 2018

!!! ज़िन्दगी !!!

ज़िन्दगी, तू इतनी क्यूँ ख़फ़ा हो गई,
कि दर्द ही दर्द की दवा हो गई !

चल अब मौत से इश्क़ करके देखें,
ज़िन्दगी तो आदतन बेवफ़ा हो गई !

तेरे मुख़्तसर से ख़याल में डूबे हुए,
आज फ़िर रात से सुबह हो गई !

जलने की ज़िद तो पतंगे ने की थी,
बदनाम तो बेवजह ही शमा हो गई !

ख़ुदारा तूने इतनी अक़्ल क्यूँ दे दी,
देख तेरी ये मख़्लूक़ आप ख़ुदा हो गई !

आज माँ के चेहरे पर एक सुकून देखा,
अदा नमाज़ और क़ुबूल दुआ हो गई !

जब मेरे यार ने मुझे गले लगाया,
कि मेरे हर मर्ज़ की शिफ़ा हो गई !

मेरी बेगुनाही की दलील सिर्फ़ इतनी है,
मैं भी इन्सान हूँ, मुझसे भी ख़ता हो गई !

ख़ुद पे यक़ीन रखके मैं आगे बढ़ता रहा,
'फ़राज़मुकम्मल हर एक दुआ हो गई !

||| फ़राज़ |||

ख़फ़ा= Displeased, Angry
आदतन= Habitually
बेवफ़ा= Faithless, Treacherous
मुख़्तसर= Concise, Short, Brief
ख़याल= Thought
ज़िद= Insistence
पतंगा= Moth
बदनाम= Defame, Malign
बेवजह= Without reason
शमा= Candle
ख़ुदारा= God
अक़्ल= Wisdom, Brain, Knowledge
मख़्लूक़= Creation
आप= Self
सुकून= Peace
नमाज़= prayer (especially as prescribed by the Muslim law)
क़ुबूल= Accept
दुआ= benediction
मर्ज़= Sickness, Illness
शिफ़ा= Cure, Healing
बेगुनाही= Innocence
दलील= Argument
ख़ता= Mistake, Fault
ख़ुद= Self, Oneself
यक़ीन= Trust, Confidence
मुकम्मल= Complete



गुरुवार, 30 नवंबर 2017

वो हमारा कब था !

दिल्लगी का इल्ज़ाम भला उसको क्यूँ दें,
हम ही तो उसके थे वो हमारा कब था !

जिस नाख़ुदा के हवाले थी कश्ती अपनी,
वो तो एक मौज था, वो किनारा कब था !

जिसके तसव्वुर पर हम दिल हार बैठे थे,
उसकी ज़ुल्फ़ों को अभी हमने संवारा कब था !

उसका ज़िक्र तो सिर्फ़ धड़कन से किया था,
उस नाम को होंठों से अभी पुकारा कब था !

अभी नज़र भरके देखा भी न था उसको,
दिल में उस चाँद से चेहरे को उतारा कब था !

दीदार की ख़ातिर सिर्फ़ हम ही बेक़रार न थे,
हमको देखे बिना उसका भी गुज़ारा कब था !

एक दुश्मन-ए-जां से मानूस हो बैठा है,
इतना मजबूर ये दिल या ख़ुदारा कब था !

उससे तो हर तक़ाज़ा अब महशर में होगा,
क़र्ज़ मेरी वफ़ाओं का उसने उतारा कब था !

कैसे जीता रहा भला तू मुझसे जुदा हो के,
एक लम्हा भी तो मेरे बिना गवारा कब था !

तूने तो दिल हार कर मैंने जीता था उसको,
'फ़राज़' दिल के सौदे में कोई ख़सारा कब था !


|||फ़राज़|||


दिल्लगी= Amusement, Merriment
इल्ज़ाम= Blame, Acquisition.
नाख़ुदा= Boatman, Sailor, Master of the ship.
कश्ती= Boat
मौज= Wave.
तसव्वुर= Imagination, Contemplation, 
ज़िक्र= Narration, Remembrance, Talk.
दीदार= Appearance, Sight.
ख़ातिर= For the sake.
बेक़रार= Restless
गुज़ारा= Passage.
दुश्मन-ए-जां= Enemy of the heart, Beloved.
मानूस= Intimate, Associate, Friendly,
ख़ुदारा= Oh God.
तक़ाज़ा= Demand, Urge, pressing settlement of the claim.
महशर= Tumult, Day of resurrection, The Place of rising and assembling after death.
वफ़ा= Fidelity, Faithfulness.
गवारा= Tolerable, Acceptable, Bearable.
ख़सारा= Loss.

मंगलवार, 31 अक्टूबर 2017

दुश्वारी!!!

क्या अजब चाहत थी, क्या ग़ज़ब दुश्वारी थी,
घर मेरा मिट्टी का था, बरसात से मेरी यारी थी !
तूफ़ान को भी ख़ुदारा क्यूँ आज ही आना था,
आज ही तो मैंने कश्ती लहरों में उतारी थी !

जब आँख खुली मेरी तो ये इल्म हुआ मुझको
मदहोशी जिसको समझा, वो तो बस ख़ुमारी थी !
न मैंने ही आवाज़ दी, न तुमने मुड़कर देखा,
तुमको भी था ग़ुरूर, मेरी भी कुछ ख़ुद्दारी थी !

जिसकी आतिश में जलकर हम ख़ाक हो गए,
बुझकर भी न बुझ सकी, जाने कैसी चिंगारी थी ! 
'फ़राज़' तेरे इश्क़ को तो नाकाम होना ही था,
तू सुखन का ताजिर था, उसकी नौकरी सरकारी थी !

|||फ़राज़|||

दुश्वारी= Difficulty.
ख़ुदारा= Oh God.
इल्म=Knowledge, Learning.
मदहोशी= Intoxication.
ख़ुमारी= Hangover
ग़ुरूर= Proud
ख़ुद्दारी= Self-respect
आतिश= Fire, Flame
ख़ाक= Dust, Ashes, Worthless.
चिंगारी= Spark, Scintilla.
नाकाम=Unsuccessful, Failure.
सुखन= Speech, Language, Words,
ताजिर= Trader.