कभी रंग स्याह हुआ, कभी मैं गुलाल हुआ,
जब बे-ख़याल हुआ, तब मैं कमाल हुआ !
उजालों की क़द्र तो अंधेरों में समझ पाया हूँ,
बुझ-बुझ के जब जला तो रौशन मशाल हुआ !
मैंने किसी ग़ज़ल में तेरा नाम न लिखा,
तेरी बदनामियों का फ़िर भी मुझसे सवाल हुआ !
मर जायेंगे बिछड़ कर, ये आपने कहा था,
माथे पे शिकन तक नहीं, ये क्या मलाल हुआ !
इश्क़ कामिल हुआ तो मस'अलों में उलझ गया,
इश्क़ जो अधूरा रहा वो हरगिज़ मिसाल हुआ !
मील का पत्थर साबित हुई मेरी हर ठोकर,
जितना ठुकराया गया उतना बा-कमाल हुआ !
अपनी हस्ती पर ग़ुरूर न कर ऐ उगते सूरज,
'फ़राज़' जो भी उरूज हुआ, उसका ज़वाल हुआ !
||| फ़राज़ |||
||| फ़राज़ |||
स्याह= Black
गुलाल= Gulal Is A Colorful Dry Powdered,
Which Is Used In The Festival Of Holi. It Is Also Used In Making Rangoli.
बे-ख़याल= Thoughtless
कमाल= Perfect, Complete,
Excellent,
क़द्र= Dignity, Honor,
Merit, Value
रौशन= Bright,
Illuminate
मशाल= Lamp, Torch
माथे= Forehead
शिकन= Wrinkle
मलाल= Regret, Grief,
Sorrow
कामिल= Complete, Perfect
मस'अला= Problem, Aphorism, Matter,
हरगिज़= Ever
मिसाल= Example, Instance,
Model
मील का पत्थर= Mile-Stone
साबित= Prove, Evidence
बा-कमाल= With Perfection,
Art
हस्ती= Existence, Life
ग़ुरूर= Proud, Haughtiness,
Vanity, Glory
उरूज= Rise,
Exaltation, Ascension
ज़वाल= Decline, Afternoon When The Sun Is On The Decline, Diminution