चेहरों
की इतनी फ़िक्र क्यूँ है,
रंगों
की इतनी क़द्र क्यूँ है ?
हुस्न अस्ल किरदार का है,
गोरा
काले से बेहतर क्यूँ है ?
हसरत को कैसे समझाऊँ,
इतनी
छोटी चादर क्यूँ है ?
नीयत का दोष ही सारा है,
तो
फ़िर बदनाम नज़र क्यूँ है ?
सब एक ख़ुदा के बच्चे हैं,
तो
फ़िर मस्जिद-मंदिर क्यूँ हैं ?
वो भी तो बस एक इंसाँ है,
उसके सजदे में सर क्यूँ हैं ?
सब मिलके साथ नहीं रहते,
इतने
छोटे अब घर क्यूँ हैं ?
जिनकी जेबें ही ख़ाली हैं,
उनको रहज़न से डर क्यूँ है ?
ये फ़िक्र बहुत है दुनिया को,
'फ़राज़' इतना बे-फ़िक्र क्यूँ है !
||| फ़राज़ |||
फ़िक्र= Concern, Anxiety
क़द्र= Dignity, Honor, Merit, Value
हुस्न= Beauty, Elegance, Comeliness
अस्ल= Real, Original
किरदार= Character
बेहतर= Better
हसरत= Desire
नीयत= Intention, Purpose, Object
दोष= Fault
बदनाम= Defame, Malign
इंसाँ= Human
सजदा= Bowing In Prayer So As To Touch The Ground With The Forehead
ख़ाली= Empty
रहज़न= A Robber
बे-फ़िक्र= Careless
बे-फ़िक्र= Careless