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शुक्रवार, 2 फ़रवरी 2018

!!! तजरबे !!!

तू क्या बतलायेगा मुझको क़द्र दिन के उजालों की,
कि मैंने स्याहियों के घर में भी रह कर के देखा है !

मेरी तालीम की क़ीमत बख़ूबी जानता हूँ मैं,
कि मैंने जाहिलों के घर में भी रह कर के देखा है !

बहुत ही मुख़्तसर सामाँ ज़रूरी ज़िन्दगी को है,
कि मैंने जोगियों के घर में भी रह कर के देखा है !

तू मेरे क़त्ल की कोई नई तरकीब लेकर आ,
कि मैंने क़ातिलों के घर में भी रह कर के देखा है !

हुनर यूँही नहीं कामिल मेरा तूफ़ाँ से लड़ने का,
कि मैंने आँधियों के घर में भी रह कर के देखा है !

मुझे मिसमार करना है तो लेकर आ क़यामत तू,
कि मैंने ज़लज़लों के घर में भी रह कर के देखा है !

कि मुझको है तजरबा आंसुओं के सारे रंगों का,
कि मैंने नादिमों के घर में भी रह कर के देखा है !

ग़लत इलज़ाम की अक्सर सज़ा लोगों को मिलती है,
कि मैंने मुजरिमों के घर में भी रह कर के देखा है !

मुसल्ले की जगह मेरे लिए वो पाक रखते हैं,
कि मैंने काफ़िरों के घर में भी रह कर के देखा है !

सबक़ फ़राज़से ले लो, कि कर लो इश्क़ से तौबा,
कि मैंने मजनुओं के घर में भी रह कर के देखा है !

||| फ़राज़ |||

क़द्र= Value
स्याहियां= Blackness
मुख़्तसर= Brief, little.
सामाँ= Provisions, Goods, Luggage.
ज़रूरी= Essential, Requisite.
जोगी= Hermit, Ascetic.
क़त्ल= Murder
तरकीब= Trick
क़ातिल= Murderer
हुनर= Art, Skill, Knowledge.
कामिल= Perfect, Complete
तूफ़ाँ=  Tempest, storm
मालूम= Know
तालीम= Education.
बख़ूबी= Completely, Thoroughly
जाहिल= Illiterate, Uncivilised.
ग़लत= Wrong, Erroneous.
इल्ज़ाम= Blame, Accusation.
सज़ा= Punishment
मुजरिम= Criminal, Offender, Sinner.
मुसल्ला= The prayer-carpet.
पाक= Pure, Clean, Holy.
काफ़िर= Infidel
तजरबा= Experience.
नादिम= Ashamed, Sorry, Penitent, Repent.
मिसमार= Demolished, Raised.
क़यामत= Apocalypse, Doomsday
ज़लज़ला= Earthquake
सबक़= Lesson.
तौबा= Vowing to sin no more, Penitence.



शुक्रवार, 15 सितंबर 2017

अशआर की हाज़िरी !!!

मेरी हस्ती को दरकार नहीं शीशों की,
रेज़ा-रेज़ा होकर मुझे शीशागरी आई है !

है ग़रज़ तो ले ले  तू मेरी ठोकरों से सबक़,
जा-ब-जा भटका हूँ तो मुझे रहबरी आई है !

बस यही पल हैं हक़ीकत, तू जी भर जी ले,
क्या ख़बर कौन सी सांस आखरी आई है !

फ़ुरसतें, आवारगी, और सब शौक़-ओ-जूनून,
आदतों के सौदे में हाथ ये नौकरी आई है !

चल के काँटों पे है मैंने हँसना सीखा,
हो के मिसमार तजुर्बों से मसख़री आई है !

तू क्यूँ हैरान होता है मेरी बेनियाज़ी पर,
तेरी बेरुख़ी से ही हमें ये ख़ुदसरी आई है !

तेरी सोहबत हुई तो इश्क़ को जाना हमने,
तेरी फ़ुरक़तों में हासिल ये शायरी आई है !

तू भी फ़राज़ के अल्फाज़ से हानत ले ले,
आज फ़िर मुझपर अशआर की हाज़िरी आई है !

|||
फ़राज़|||

दरकार= Need, Necessity.
रेज़ा-रेज़ा= Shattered.
शीशागरी= Glass making.
ग़रज़= Intention, Purpose, Object. 
जा-ब-जा= Everywhere
रहबरी= Guidance.
फ़ुरसत= Leisure.
आवारगी= Wandering, Waywardness.
शौक़= Ardour, Desires.
जूनून= Frenzy, Madness.
मिसमार- Demolished, Razed, Ruined.
मसख़री= Comedy, Funnyness.
बेनियाज़ी= Unconcern, Not being in any need.
बेरुख़ी= Ignorance, Indifference.
ख़ुदसरी= Obstinate, Stubbornness.
सोहबत= Association, Company.
फ़ुरक़त= Absences, Separation.
अल्फाज़= Words.
ज़हानत= Intelligence.
अशआर= Couplets.
हाज़िरी= Presence, Attendance.