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शुक्रवार, 10 अगस्त 2018

किरदार !!!

चेहरों की इतनी फ़िक्र क्यूँ है,
रंगों की इतनी क़द्र क्यूँ है ?

हुस्न अस्ल किरदार का है,
गोरा काले से बेहतर क्यूँ है ?

हसरत को कैसे समझाऊँ,
इतनी छोटी चादर क्यूँ है ?

नीयत का दोष ही सारा है,
तो फ़िर बदनाम नज़र क्यूँ है ?

सब एक ख़ुदा के बच्चे हैं,
तो फ़िर मस्जिद-मंदिर क्यूँ हैं ?

वो भी तो बस एक इंसाँ है,
उसके सजदे में सर क्यूँ हैं ?

सब मिलके साथ नहीं रहते,
इतने छोटे अब घर क्यूँ हैं ?

जिनकी जेबें ही ख़ाली हैं,
उनको रहज़न से डर क्यूँ है ?

ये फ़िक्र बहुत है दुनिया को,
'फ़राज़इतना बे-फ़िक्र क्यूँ है !

||| फ़राज़ |||

फ़िक्र= Concern, Anxiety
क़द्र= Dignity, Honor, Merit, Value
हुस्न= Beauty, Elegance, Comeliness
अस्ल= Real, Original
किरदार= Character
बेहतर= Better
हसरत= Desire
नीयत= Intention, Purpose, Object
दोष= Fault
बदनाम= Defame, Malign
इंसाँ= Human
सजदा= Bowing In Prayer So As To Touch The Ground With The Forehead
ख़ाली= Empty
रहज़न= A Robber
बे-फ़िक्र= Careless

बे-फ़िक्र= Careless