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मंगलवार, 31 अक्टूबर 2017

दुश्वारी!!!

क्या अजब चाहत थी, क्या ग़ज़ब दुश्वारी थी,
घर मेरा मिट्टी का था, बरसात से मेरी यारी थी !
तूफ़ान को भी ख़ुदारा क्यूँ आज ही आना था,
आज ही तो मैंने कश्ती लहरों में उतारी थी !

जब आँख खुली मेरी तो ये इल्म हुआ मुझको
मदहोशी जिसको समझा, वो तो बस ख़ुमारी थी !
न मैंने ही आवाज़ दी, न तुमने मुड़कर देखा,
तुमको भी था ग़ुरूर, मेरी भी कुछ ख़ुद्दारी थी !

जिसकी आतिश में जलकर हम ख़ाक हो गए,
बुझकर भी न बुझ सकी, जाने कैसी चिंगारी थी ! 
'फ़राज़' तेरे इश्क़ को तो नाकाम होना ही था,
तू सुखन का ताजिर था, उसकी नौकरी सरकारी थी !

|||फ़राज़|||

दुश्वारी= Difficulty.
ख़ुदारा= Oh God.
इल्म=Knowledge, Learning.
मदहोशी= Intoxication.
ख़ुमारी= Hangover
ग़ुरूर= Proud
ख़ुद्दारी= Self-respect
आतिश= Fire, Flame
ख़ाक= Dust, Ashes, Worthless.
चिंगारी= Spark, Scintilla.
नाकाम=Unsuccessful, Failure.
सुखन= Speech, Language, Words,
ताजिर= Trader.