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बुधवार, 9 मई 2018

!!! हसरत-ए-दिल-ए-नाकाम !!!

जब एक याद मुसलसल होती है,
तो एक तकलीफ़ मुकम्मल होती है !

क़ुबूल करे भी क्यूँ अल्लाह मेरे सजदे,
ज़हन में तो तू हर पल होती है !

हर जवाब पर नया सवाल करती है,
ज़िन्दगी पहेली की कब हल होती है !

बेहतर यही कि हालात पे सब्र कर ले,
हर मुराद कहाँ मुकम्मल होती है !

ज़िन्दगी भर ये भीड़ कहाँ नदारद थी,
जो मेरे जनाज़े में शामिल होती है !

तू समझदार है तो उसे माफ़ कर दे,
सबको कहाँ बराबर अक़्ल होती है !

हसरत-ए-दिल-ए-नाकाम बदल नहीं सकती,
महज़ इरादों की रद्द-ओ-बदल होती है !

कौन कहता है कि तन्हाई में ख़सारा है,
जब तन्हाई होती है तो ग़ज़ल होती है !

रफ़ीक़-ए-दिल भी और दुश्मन-ए-जाँ भी,
मोहब्बत भी क्या खूब शग़्ल होती है !

क़ुसूर तो फ़राज़’ महज़ शराब का है,
बदनाम तो बेवजह ही बोतल होती है !

||| फ़राज़ |||

तकलीफ़= Pain, Trouble, Difficulty.
मुसलसल= Continuous, Linked,
मुकम्मल= Complete
क़ुबूल= Accept, Consent
सजदा=  Sajda Is A Posture In Prayer Where One Bends One's Head In Submission To God In The Direction Of The Kaaba At Mecca.
ज़हन= Mind
हालात= Circumstances
सब्र= Patience 
मुराद= Wish, Desire
नदारद= Missing, Vanished, Extinct.
जनाज़ा= Funeral
शामिल= Include, Comprise
अक़्ल= Knowledge, Wisdom
हसरत-ए-दिल-ए-नाकाम= Desire Of Unsuccessful Heart
महज़= Only, Merely
इरादा= Intention, Will
रद्द-ओ-बदल= Falsification, Alteration
तन्हाई= Loneliness
ख़सारा= Loss
रफ़ीक़-ए-दिल= Friend/Companion Of Heart
दुश्मन-ए-जाँ= Enemy Of The Heart, Beloved
शग़्ल= Hobby
क़ुसूर= Fault, Mistake
शराब= Wine, Liquor.
बदनाम= Defame, Malign
बेवजह= Without Cause

शनिवार, 3 मार्च 2018

!!! ज़िन्दगी !!!

ज़िन्दगी, तू इतनी क्यूँ ख़फ़ा हो गई,
कि दर्द ही दर्द की दवा हो गई !

चल अब मौत से इश्क़ करके देखें,
ज़िन्दगी तो आदतन बेवफ़ा हो गई !

तेरे मुख़्तसर से ख़याल में डूबे हुए,
आज फ़िर रात से सुबह हो गई !

जलने की ज़िद तो पतंगे ने की थी,
बदनाम तो बेवजह ही शमा हो गई !

ख़ुदारा तूने इतनी अक़्ल क्यूँ दे दी,
देख तेरी ये मख़्लूक़ आप ख़ुदा हो गई !

आज माँ के चेहरे पर एक सुकून देखा,
अदा नमाज़ और क़ुबूल दुआ हो गई !

जब मेरे यार ने मुझे गले लगाया,
कि मेरे हर मर्ज़ की शिफ़ा हो गई !

मेरी बेगुनाही की दलील सिर्फ़ इतनी है,
मैं भी इन्सान हूँ, मुझसे भी ख़ता हो गई !

ख़ुद पे यक़ीन रखके मैं आगे बढ़ता रहा,
'फ़राज़मुकम्मल हर एक दुआ हो गई !

||| फ़राज़ |||

ख़फ़ा= Displeased, Angry
आदतन= Habitually
बेवफ़ा= Faithless, Treacherous
मुख़्तसर= Concise, Short, Brief
ख़याल= Thought
ज़िद= Insistence
पतंगा= Moth
बदनाम= Defame, Malign
बेवजह= Without reason
शमा= Candle
ख़ुदारा= God
अक़्ल= Wisdom, Brain, Knowledge
मख़्लूक़= Creation
आप= Self
सुकून= Peace
नमाज़= prayer (especially as prescribed by the Muslim law)
क़ुबूल= Accept
दुआ= benediction
मर्ज़= Sickness, Illness
शिफ़ा= Cure, Healing
बेगुनाही= Innocence
दलील= Argument
ख़ता= Mistake, Fault
ख़ुद= Self, Oneself
यक़ीन= Trust, Confidence
मुकम्मल= Complete