जब एक याद मुसलसल होती है,
तो एक तकलीफ़ मुकम्मल होती है !
क़ुबूल करे भी क्यूँ अल्लाह मेरे सजदे ,
ज़हन में तो तू हर पल होती है !
हर जवाब पर नया सवाल करती है
ज़िन्दगी पहेली की कब हल होती है !
बेहतर यही कि हालात पे सब्र कर ले ,
हर मुराद कहाँ मुकम्मल होती है !
ज़िन्दगी भर ये भीड़ कहाँ नदारद थी
जो मेरे जनाज़े में शामिल होती है !
तू समझदार है तो उसे माफ़ कर दे ,
सबको कहाँ बराबर अक़्ल होती है !
हसरत-ए-दिल-ए-नाकाम बदल नहीं सकती ,
महज़ इरादों की रद्द-ओ-बदल होती है !
कौन कहता है कि तन्हाई में ख़सारा है ,
जब तन्हाई होती है तो ग़ज़ल होती है !
रफ़ीक़-ए-दिल भी और दुश्मन-ए-जाँ भी ,
मोहब्बत भी क्या खूब शग़्ल होती है !
क़ुसूर तो ‘फ़राज़’ महज़ शराब का है ,
बदनाम तो बेवजह ही बोतल होती है !
||| फ़राज़ |||
तकलीफ़= Pain, Trouble,
Difficulty.
मुसलसल= Continuous,
Linked,
मुकम्मल= Complete
क़ुबूल= Accept,
Consent
सजदा= Sajda Is
A Posture In Prayer Where One Bends One's Head In Submission To God In The
Direction Of The Kaaba At Mecca.
ज़हन= Mind
हालात= Circumstances
सब्र= Patience
मुराद= Wish, Desire
नदारद= Missing,
Vanished, Extinct.
जनाज़ा= Funeral
शामिल= Include,
Comprise
अक़्ल= Knowledge, Wisdom
हसरत-ए-दिल-ए-नाकाम= Desire Of Unsuccessful Heart
महज़= Only, Merely
इरादा= Intention,
Will
रद्द-ओ-बदल= Falsification, Alteration
तन्हाई= Loneliness
ख़सारा= Loss
रफ़ीक़-ए-दिल= Friend/Companion
Of Heart
दुश्मन-ए-जाँ= Enemy Of The Heart, Beloved
शग़्ल= Hobby
क़ुसूर= Fault, Mistake
शराब= Wine, Liquor.
बदनाम= Defame, Malign