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सोमवार, 15 जनवरी 2018

ख़ैर-ख़बर

हमने समझा था कि दिल संभल गया होगा,
जाने क्या बात है कि आँख भर आती है !

न पूछ क़िस्सा तू मेरी मोहब्बत का,
चोट सीने की पुरानी सी उभर आती है !

पलकों पे छोड़ जाती है भीगे लम्हें,
दिल में जब यादों की लहर आती है !

माना कि तू मेरा कोई नहीं लगता,
अच्छा लगता है जब ख़ैर-ख़बर आती है !

कि वो क़ुर्बत नहीं, महज़ तिजारत है,
वो मोहब्बत, जो शर्तों पर आती है !

नाख़ुदा का किरदार भी पता चल जाता है,
कश्तियाँ 'फ़राज़' जब बीच भंवर आती हैं !

||| फ़राज़ |||

क़िस्सा= Tale, Story.
ख़ैर-ख़बर= News/ Information of wellness/goodness.
क़ुर्बत= vicinity, nearness.
महज़= Merely, Only
तिजारत= Trade, Commerce.
शर्त= Condition, Term, Stipulation.
नाख़ुदा= Boatman, Sailor, Captain/Commander of the ship.
किरदार= Character.
कश्ती= Boat.
भंवर= whirlpool vertex.