कुन पे फ़या
कुन मुझे होती नहीं हासिल,
शायद मेरी तड़प ही अभी है नहीं कामिल !
रूठा है इतना मुझसे कि मरहम तो छोड़िये,
रब मुझपे तो अज़ाब भी करता नहीं नाज़िल !
काग़ज़ की कश्तियों सी हसरत न पालिए,
काग़ज़ की कश्तियों के होते नहीं साहिल !
वो हैं नहीं जाहिल कि जो मक़तब नहीं गए,
पढ़-लिख के बेशऊर हैं, वो लोग हैं जाहिल !
उस आम सी हसीं में कुछ ख़ास है ज़रूर,
हर एक से तो दिल ये होता नहीं माइल !
क्या बात है दिलों की बस जानता है दिल,
समझेगा ज़हन कैसे, दिल की है क्या मुश्किल !
रंगीन मह्फ़िलों में वासिल जो यार थे,
बरबादियों में मेरी क्यूँ हैं नहीं शामिल !
इंसाफ़ की मीज़ान पे गर तौलिये ख़ुद को,
आदिल भी तेरे अद्ल के हो जायेंगे क़ाइल !
'अल्फ़ाज़' अपनी शह से हम मात खा गए,
शायद है दोस्तों में दुश्मन कोई शामिल !
||| अल्फ़ाज़ ||
कुन फ़याकुन = Be And It Happens-Command Of God
हासिल = Gain, Result
कामिल = Perfect, Complete
मरहम = Ointment
अज़ाब = Torment, Agony
नाज़िल = Descending, Arriving At
काग़ज़ = Paper
कश्ती = A Boat, A Ship,
हसरत = Unfulfilled Desire
साहिल = The Sea-Shore, Beach, Coast
जाहिल = Illiterate
मकतब = School, Academy
बे-शऊर = Immoral,
Improper, Indecent.
आम= Common,
General
हसीं= Beautiful
माइल=
Inclined, Attracted, Bent
ज़हन=
Mind,
महफ़िल= Assembly,
Gathering, Party
वासिल= Joined, One Who Meets,
Connected Together
इंसाफ़= Justice,
Fair Play, Equity
मीज़ान= Balance, Scale
आदिल= Just, Justice
अद्ल= Justice, Equity, Fairness,
Fair-Play
क़ाइल= Agree,
Consent, Convince,