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रविवार, 3 फ़रवरी 2019

किरदार

न रंग, न रूप,  सिंगार का रखिए,
ध्यान तो महज़ किरदार का रखिए !

वक़्त से कहिए कि ठहर जाए ज़रा,
कुछ अदब उनके दीदार का रखिए !

प्यार में ख़ुद ही बिक मत जाना,
सलीक़ा दिल के व्यापार का रखिए !

कुछ राज़ तो महज़ राज़ ही रखिए,
ये एक हुनर अख़बार का रखिए !

जिस्म की क़ीमत पे ग़ैरत नहीं बिकती,
एहतिराम हुस्न के बाज़ार का रखिए !

मज़हब को ही बनाएंगे सियासत का तुरुप,
'अल्फ़ाज़' भरोसा इस सरकार का रखिए !

||| अल्फ़ाज़ |||

सिंगार = Make Up
महज़ = Merely, Only
किरदार = Character
अदब = Respect, Courtesy
दीदार = Appearance, Sight, Seeing
सलीक़ा = Good Manners, Discreet Of Good Disposition
व्यापार = Trade, Business
राज़ = Secret
हुनर = Art, Skill, Accomplishment, Knowledge
अख़बार = Newspaper
जिस्म = Body, Substance
क़ीमत = Cost, Price, Value
ग़ैरत = Shame, Modesty, Honor, Self-Respect
एहतिराम = Respect, Honoring, Paying Attention
हुस्न = Beauty, Comeliness, Elegance
बाज़ार = Market
मज़हब = Religion
सियासत = Politics
तुरुप = Trump
सरकार = Government

रविवार, 20 जनवरी 2019

नया अख़बार

सियासत, जरायमजंग, हादसे,
इस नए अख़बार में नया क्या है !

||| अल्फ़ाज़ |||

सियासत = Politics
जरायम = Crimes
जंग = War
हादसे = Calamities

गुरुवार, 18 जनवरी 2018

शब्-ए-तन्हाई !!!

शब्-ए-तन्हाई थी, कि काटे नहीं कटती थी,
बस इसी वास्ते मैं एक जाम ख़रीद लाया हूँ !

जानता हूँ कि ये मरहम भी कामिल तो नहीं है,
कुछ लम्हों का सही, मैं आराम ख़रीद लाया हूँ !

अब दोस्तों पे ख़र्च करूँ, या तसव्वुर-ए-यार पर,
दिन भर की कमाई से मैं ये शाम ख़रीद लाया हूँ !

ये ज़माना एक दिन तुझको भी दीवाना कहेगा,
मैं भी इश्क़ करके एक इल्ज़ाम ख़रीद लाया हूँ !

सिर्फ़ दिल-ए-नादाँ ही उसकी उम्मीद लगाये बैठा है,
यूँ तो मैं अपनी मौत का हर सामान ख़रीद लाया हूँ !

बता कैसे हरायेगा अब तू मुझे इंसाफ़ के खेल में,
तू वकील ही तो लाया है, मैं हुक्काम ख़रीद लाया हूँ !

तुझसे ही सीखा है मैंने सियासत का सबक़,
मैं भी ईमान बेचकर आवाम ख़रीद लाया हूँ !

आज फ़िर मेरे ज़मीर को कोई ख़रीद न सका,
मैं न बिक कर भी अपना दाम ख़रीद लाया हूँ !

वो रंगीन गुब्बारे इतने महंगे भी न लगे 'फ़राज़',
मैं किफ़ायत से बच्चों की मुस्कान ख़रीद लाया हूँ !

||| फ़राज़ |||

शब्-ए-तन्हाई= Night of loneliness.
वास्ते= For, for the cake of, 
जाम= Glass of wine.
मरहम= Ointment.
कामिल= Perfect, Complete.
तसव्वुर-ए-यार= Thinking about the beloved.
इल्ज़ाम= Blame, Accusation
दिल-ए-नादाँ= Innocent heart.
इंसाफ़= Justice
वकील= Lawyer, Advocate
हुक्काम= Judges, Magistrate, Authorities.
सियासत= Politics, Administration.
ईमान= Conscience, Faith.
आवाम= Public, Common People.
ज़मीर= Conscience, Heart, Pronoun.
किफ़ायत= Economy, careful management of money.

मंगलवार, 12 दिसंबर 2017

वतन और मज़हब !

मुताला क़ुर'आन से है कि वतनपरस्ती ईमान है,
मेरा क़ायदा इस्लाम है, और मज़हब हिन्दोस्तान है !

मेरी दीवार पर हिंदी में लिखो अल्लाह का नाम,
मेरी बुनियाद तो उर्दू है पर हिंदी मेरा दालान है !

तुम न कर पाओगे बंटवारा मेरी तहज़ीब का,
उर्दू तो मेरी क़ौम है मगर हिंदी मेरी पहचान है !

एक माँ की मोहब्बत, दूजी बहन के प्यार जैसी है,
मेरा अंदाज़-ए-बयां उर्दू है, हिंदी-रवां मेरी ज़ुबान है !

ख़ुदाओं की सियासत करते हैं ख़ुदा बेचने वाले,
जो उनकी इता'अत करते हैं वो भी कितने नादान हैं !

मय्यतें भला कब पूछती हैं कन्धों का मज़हब,
फ़िर भी ता-ज़िन्दगी मज़हब का ही इम्तिहान है !

ज़ुल्म बेज़ुबां पर हो तो वो भी शोर करता है,
हम क्यूँ लब-कुशा नहीं, यूँ तो हम बाज़ुबां हैं !

एक ही जोड़े की तो नस्ल सब इंसान हैं 'फ़राज़',
मज़हब मुख़्तलिफ़ सही, मगर एक ही ख़ानदान है ! 

यहीं सुनी पहली अज़ान, यहीं नमाज़-ए-आख़िर होगी,
यहीं मेरा पहला घर है और यहीं आख़िरी मकान है !

माना की पुरखों ने निभाए हैं झगड़े इबादतगाहों के,
चलो अब मिलकर सुलझा लें, हम लोग तो नौजवान हैं !

|||फ़राज़|||

मुताला= Study, Reference. 
क़ुर'आन= The Holy Quran. 
वतनपरस्ती= Patriotism.
ईमान= Belief, Conscience, Faith, Creed.
क़ायदा= Rule, System.
इस्लाम= The religion proclaimed by the Holy Prophet Mohammed (P.B.U.H.)
मज़हब= Religion.
बुनियाद= Foundation, Elementry, Basic.
दालान= Verandah.
तहज़ीब= Adorning, Politeness.
क़ौम= Tribe, Race, People.
दूजी= Other, Second.
अंदाज़-ए-बयां= Style of narration
हिंदी-रवां= Active/Souled in the Hindi Language.
ज़ुबान= Dialect, Language, Tongue.
सियासत= Politics.
इता'अत= Obedience.
नादान= Foolish, Innocent
मय्यत= Dead body, Corpse.
मज़हब= Religion.
ता-ज़िन्दगी= Till the end of life, All life.
इम्तिहान= Test, Exam.
ज़ुल्म= Oppression, Injustice.
बेज़ुबां= Speechless, Dumb.
लब-कुशा= Opened lips.
बाज़ुबां= One who can speak.
जोड़ा= Couple.
नस्ल= Breed, Caste, Pedigree
मुख़्तलिफ़= Different Unlike.
ख़ानदान= Family.
अज़ान= The Islamic call to prayer.
नमाज़-ए-आख़िर= The Islamic Funeral Prayer. The final prayer.
पुरखे= Ancestors.
इबादतगाह= A Place of worship.

शुक्रवार, 14 अप्रैल 2017

क़ायदा !!!


अपनी ही ठोकरों से क़ायदा सीखेगा,
नस्ल-ए-आदम हैकरके ख़ता सीखेगा!

ये रंगीनियाँआसाईशेंये  फ़रेब ज़माने के,
शौक़-ए-लज़्ज़त में कितने गुनाह सीखेगा!


आलिम-ए-दीन भी अब तो करते हैं सियासत,
इनकी सोहबत में कौन सा ख़ुदा सीखेगा!


देखना तू भी तड़पेगा दिलनवाज़ी करके,
इश्क़ करके ही नुक़्साँ-ओ-नफ़ा सीखेगा!

तालीमगाहों में सीखेगा किताबी बातें,
ज़िन्दगी से लड़कर ही तजरबा सीखेगा!


शोर में भी अगर तू तन्हा सा रहता है,
तो ख़ामोशी में दिल की ज़बाँ सीखेगा!


जीतना है तो फ़िर तू हार से न डर,
हार कर ही जीतने का सलीक़ा सीखेगा!

स्याह रात के बाद सुबह होती है 'अल्फ़ाज़',
बार-हा ये सबक़ भी तो तू सुबह सीखेगा!

||| अल्फ़ाज़ |||

क़ायदा=  Regulations, Custom, Rule, Habit.
नस्ल-ए-आदम= Progeny Of Adam.
रंगीनियाँ= Ornateness.
आसाईशें= Comfort, Luxury.
फ़रेब=Deceit, Deception.
शौक़-ए-लज़्ज़त= Desire Of Enjoyment.
आलिम-इ-दीन= Scholars Of The Religion.
सियासतें= Politics.
दिलनवाज़ी= Heart-pleasing.
नुक़सान-ओ-नफ़ा= Loss and profit.
तालीमगाह= Seminary.
सलीक़ा= manner.
स्याह= Dark
बार-हा= Often