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गुरुवार, 2 अगस्त 2018

बुरा है !

इस क़दर ये ज़माना बुरा है,
कि बे-वजह मुस्कुराना बुरा है !

बात घर की निकल जाये बाहर,
इतना भी दोस्ताना बुरा है !

झाँक कर के गरेबाँ भी देखो,
सबपे ऊँगली उठाना बुरा है !

आईना ज़रा ख़ुद भी देखो,
कौन कहता ज़माना बुरा है !

नफ़रतें हों तो दिल में ही रखिये,
प्यार है तो छुपाना बुरा है !

दिल्लगी को चलो भूल जाओ,
इश्क़ को तो भुलाना बुरा है !

इम्तिहाँ हो जो इंसानियत का,
उसमें अपना-बेगाना बुरा है !

हो जाये गुनाह कोई सरज़द,
ऐसा रुपया कमाना बुरा है !

हो छुपाये किसीकी जो इज्ज़त,
ऐसा पर्दा हटाना बुरा है !

मैं करता नहीं जाँ की परवाह,
दुश्मनों का निशाना बुरा है !

बात कुछ तो पते की है कहता
'फ़राज़' को मैंने माना बुरा है !

||| फ़राज़ |||

क़दर= Amount, Degree
ज़माना= Time, World, Era
बे-वजह= Causeless, Without cause
दोस्ताना= Friendship
गरेबाँ= Collar
दिल्लगी= Flirt
इम्तिहाँ= Exam, Test
इंसानियत= Humanity
अपना-बेगाना= Nepotism, Favouritism
सरज़द= Be committed.
जाँ= Life.

बुधवार, 25 अप्रैल 2018

ग़ज़ल-ए-फ़राज़ !!!

फ़र्क़ पड़ता है क्या कि सज़ा क्या है,
इश्क़ बदनाम न हो तो मज़ा क्या है !

रतजगे, तन्हाई, मलाल और तड़प,
हमको मालूम है कि वफ़ा क्या है !

अरमान दिल में तो कई बाक़ी हैं,
 ज़हन, तेरा मशवरा क्या है !

इश्क़ करना है तो फ़िर ये न सोचिये,
कि नुक़सान क्या, और नफ़ा क्या है !

इश्क़ गुनाह है तो हम मुजरिम बेहतर,
इश्क़ मर्ज़ है तो फिर शिफ़ा क्या है !

आज फ़िर हूँ मैं तेरा तमन्नाई हूँ,
इस दफ़ा मेरा इम्तिहाँ क्या है !

जब दिल टूटेगा तो ख़ुद समझ जाओगे,
इश्क़ मिसरा है तो क़ाफ़िया क्या है !

ये ग़ज़ल-ए-फ़राज़ नज़ीर इस बात की है,
कि हादिसा मेरे दिल पे गुज़रा क्या है !

||| फ़राज़ |||

फ़र्क़= Difference.
रतजगा= Vigil,  Keeping Awake All Night
तन्हाई= Loneliness
मलाल= Regret
तड़प= Agitation Of Mind And Body
मालूम= Known
वफ़ा= Faithfulness, Loyalty
अरमान= Desire, Longing
बाक़ी= Remaining, Perpetual
ज़हन= Mind
मशवरा= Advice, Counsel
नुक़सान= Loss, Damage
नफ़ा= Profit
गुनाह= Sin, Crime
मुजरिम = Sinner, Culprit.
बेहतर= Better
मर्ज़= Illness, Sickness
शिफ़ा= Heal, Cure
तमन्नाई= Wisher, Desirous, 
दफ़ा= Time
इम्तिहाँ= Exam, Trail, Test
मिसरा= One Line Of A Couplet Or Verse.
क़ाफ़िया= Rhyme, The Last Or Second Last Words Of Each Verse Is Called Qafiya
ग़ज़ल-ए-फ़राज़= Gazal Of Faraz
नज़ीर= Precedent, Example.
हादिसा= Accident, Calamity, Misfortune
गुज़रा= Passed, Gone

मंगलवार, 12 दिसंबर 2017

वतन और मज़हब !

मुताला क़ुर'आन से है कि वतनपरस्ती ईमान है,
मेरा क़ायदा इस्लाम है, और मज़हब हिन्दोस्तान है !

मेरी दीवार पर हिंदी में लिखो अल्लाह का नाम,
मेरी बुनियाद तो उर्दू है पर हिंदी मेरा दालान है !

तुम न कर पाओगे बंटवारा मेरी तहज़ीब का,
उर्दू तो मेरी क़ौम है मगर हिंदी मेरी पहचान है !

एक माँ की मोहब्बत, दूजी बहन के प्यार जैसी है,
मेरा अंदाज़-ए-बयां उर्दू है, हिंदी-रवां मेरी ज़ुबान है !

ख़ुदाओं की सियासत करते हैं ख़ुदा बेचने वाले,
जो उनकी इता'अत करते हैं वो भी कितने नादान हैं !

मय्यतें भला कब पूछती हैं कन्धों का मज़हब,
फ़िर भी ता-ज़िन्दगी मज़हब का ही इम्तिहान है !

ज़ुल्म बेज़ुबां पर हो तो वो भी शोर करता है,
हम क्यूँ लब-कुशा नहीं, यूँ तो हम बाज़ुबां हैं !

एक ही जोड़े की तो नस्ल सब इंसान हैं 'फ़राज़',
मज़हब मुख़्तलिफ़ सही, मगर एक ही ख़ानदान है ! 

यहीं सुनी पहली अज़ान, यहीं नमाज़-ए-आख़िर होगी,
यहीं मेरा पहला घर है और यहीं आख़िरी मकान है !

माना की पुरखों ने निभाए हैं झगड़े इबादतगाहों के,
चलो अब मिलकर सुलझा लें, हम लोग तो नौजवान हैं !

|||फ़राज़|||

मुताला= Study, Reference. 
क़ुर'आन= The Holy Quran. 
वतनपरस्ती= Patriotism.
ईमान= Belief, Conscience, Faith, Creed.
क़ायदा= Rule, System.
इस्लाम= The religion proclaimed by the Holy Prophet Mohammed (P.B.U.H.)
मज़हब= Religion.
बुनियाद= Foundation, Elementry, Basic.
दालान= Verandah.
तहज़ीब= Adorning, Politeness.
क़ौम= Tribe, Race, People.
दूजी= Other, Second.
अंदाज़-ए-बयां= Style of narration
हिंदी-रवां= Active/Souled in the Hindi Language.
ज़ुबान= Dialect, Language, Tongue.
सियासत= Politics.
इता'अत= Obedience.
नादान= Foolish, Innocent
मय्यत= Dead body, Corpse.
मज़हब= Religion.
ता-ज़िन्दगी= Till the end of life, All life.
इम्तिहान= Test, Exam.
ज़ुल्म= Oppression, Injustice.
बेज़ुबां= Speechless, Dumb.
लब-कुशा= Opened lips.
बाज़ुबां= One who can speak.
जोड़ा= Couple.
नस्ल= Breed, Caste, Pedigree
मुख़्तलिफ़= Different Unlike.
ख़ानदान= Family.
अज़ान= The Islamic call to prayer.
नमाज़-ए-आख़िर= The Islamic Funeral Prayer. The final prayer.
पुरखे= Ancestors.
इबादतगाह= A Place of worship.