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मंगलवार, 21 अगस्त 2018

याद


आँखें ही नहीं, दिल भी हल्का हो जायेगा,
ये अश्क़ बहते हैं तो बह जाने दीजिये !

जितना रोकोगे, वो याद उतना आएगा,
वो याद आता है तो याद आने दीजिये !

सुना है कि अब उसे फ़र्क़ नहीं पड़ता,
छोड़िये, अब आप भी जाने दीजिये !

उसके नाम के साथ मेरा नाम तो आ जाता है,
लोग इल्ज़ाम लगते हैं तो लगाने दीजिये !

अब तो रूठने में ही मज़ा आने लगा है,
वो मनाता है तो अब मनाने दीजिये !

लौट आएगा अगर वो अपना होगा,
'फ़राज़' वो जाता है तो उसे जाने दीजिये !

||| फ़राज़ |||

अश्क़= Tears
फ़र्क़= Difference
इल्ज़ाम= Blame

रविवार, 16 अक्टूबर 2016

जाने वाले नहीं फ़िर लौट कर आने वाले !!!

है पूछता बारिश का पानी मुझसे
कहाँ गए वो काग़ज़ की नाव चलने वाले,

अपनों की शिक़ायत ग़ैरों से क्या करूँ
ख़ुद रूठ गए मुझको मनाने वाले,

एक हवा का झौंका तूफ़ान हो गया
     ख़्वाब हो गए सब साथ निभाने वाले,

इल्ज़ाम हमने सारे तस्लीम कर लिए
मायूस हो गए इल्ज़ाम लगाने वाले,

एक बादल का टुकड़ा देखा तो याद आया,
जाने वाले फ़िर नहीं  लौट कर आने वाले !!!

||| फ़राज़ |||