है पूछता बारिश का पानी मुझसे
कहाँ गए वो काग़ज़ की नाव चलने
वाले,
अपनों की शिक़ायत ग़ैरों से
क्या करूँ
ख़ुद रूठ गए मुझको मनाने वाले,
एक हवा का झौंका तूफ़ान हो गया
ख़्वाब हो गए सब
साथ निभाने वाले,
इल्ज़ाम हमने सारे तस्लीम कर
लिए
मायूस हो गए इल्ज़ाम लगाने
वाले,
एक बादल का टुकड़ा देखा तो याद आया,
जाने वाले फ़िर नहीं लौट कर
आने वाले !!!
||| फ़राज़ |||
||| फ़राज़ |||
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