tishna लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
tishna लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 22 अप्रैल 2019

सच


इस दौर में वो सच कहता है,
मोमिन है या रिन्दना है !

सब सह कर हँसता रहता है,
पागल है या दीवाना है !

क्यूँ सिक्के जोड़ा करता है,
तुझको एक दिन मर जाना है !

किस शिद्दत से प्यासा होगा,
वो साग़र हो के तिश्ना है !

तरकीबें लाख लगाओ तुम,
जो होना है वो होता है !

एक बार तो मरने से पहले,
दिखला दे कितना ज़िन्दा है !

कुछ झूठे हमसे कहते हैं,
'अल्फ़ाज़तू कितना झूठा है !

तू ख़ुद को झूठा कहता है,
'अल्फ़ाज़तू कितना सच्चा है !

||| अल्फ़ाज़ |||
दौर = Time, Era, युगसमय
मोमिन = Believer, इश्वर में विश्वास रखने वाला
रिन्दना = Drunk, नशे में
शिद्दत = Vehemence, Severity
साग़र = Wine-Cup, Goblet, शराब का प्याला
तिश्ना = Thirsty, Insatiable, प्यासातृषित,
तरकीब = Method, Trick, युक्ति

सोमवार, 25 फ़रवरी 2019

तिश्ना

साथ मेरे एक मजमा था,
पर आईनों में तन्हा था !

प्यास मेरी क्या बतलाऊं,
मैं साग़र हो के तिश्ना था !

||| अल्फ़ाज़ |||

मजमा = Crowd, Mob, Congregation
साग़र = Wine-Cup, Goblet, Bowl
तिश्ना = Thirsty, Insatiable, Eagerly

बुधवार, 28 नवंबर 2018

दुआ

नीयत का साफ़दिल का सच्चा हो जाऊँ,
ऐ काश कि मैं फ़िर से बच्चा हो जाऊँ !

मज़हब का मज़हब से कोई झगड़ा न रहेगा,
तू सही हिन्दू बनमैं सही मुसलमाँ हो जाऊँ !

लिखा है बहुत सोच के ये राज़-ए-मग़फ़िरत,
हो जाऊँ जन्नती अगर मैं इंसाँ हो जाऊँ !

मेरे लिए बनाया है अल्लाह ने सबकुछ,
पी जाऊँ समंदर अगर मैं तिश्ना हो जाऊँ !

लोगों को तो ख़ुदा से भी शिकायत है आजकल,
मुझसे भी रहेगीचाहे मैं जितना अच्छा हो जाऊँ !

ज़िन्दा रहूँगा मैं सदा अशआ' में अपने,
हो जाऊँ मैं दफ़्न चाहे मैं धुआँ हो जाऊँ !

जी-हुज़ूरी का दौर है 'अल्फ़ाज़इस क़दर,
कि तोड़ दिया जाऊँ अगर मैं आईना हो जाऊँ !

||| अल्फ़ाज़ ||| 

नीयत = Intention, Purpose
मज़हब = Religion 
मुसलमाँ = The Muslim
राज़-ए-मग़फ़िरत = Secret Of Absolution/Pardon/Forgiveness
जन्नती= Dweller In Paradise
इंसाँ= Human Being, Mankind
तिश्ना = Thirsty, Insatiable, Eagerly
शिकायत = Complaint
अशआ'र= Couplets
दफ़्न= Burial
जी-हुज़ूरी= Yes Man; Sycophancy; "Yes Your Honour"
दौर= Age, Era, Time

क़दर= So Much, To Such A Degree

सोमवार, 8 अक्टूबर 2018

तिश्नगी

साहिल पे ला के हमको यूँ तिश्ना न कीजिये,
ढलती है रात अब तो पर्दा न कीजिये !

तिश्नगी दीदार की बढ़ जाएगीसुनिए,
चेहरा हथेलियों में छुपाया न कीजिये !

ऐसी भी क्या नज़र के मैं ईमान से जाऊँ,
यूँ मद-भरी निगाह से देखा न कीजिये !

जीते जी आप हमको मारा न कीजिये,
बिखरी हुई ये ज़ुल्फ़ संवारा न कीजिये !

है क्या ख़बर कि सच में मेरी जाँ चली जाये,
झूठी कसम यूँ जान की खाया न कीजिये !

किसको ख़बर कि कौन सा लम्हा है आख़िरी,
छोटी सी ज़िन्दगी हैरूठा ना कीजिये !

किस किस से बैर लेंकिस किस से हम लड़ें,
यूँ बे-नक़ाब हो के निकला न कीजिये !

रुक रुक के जाँ निकलती है अल्फ़ाज़ की जानाँ,
हंस हंस के यूँ ग़ैरों से तो बोला न कीजिये !

||| अल्फ़ाज़ |||

तिश्नगी= Thirst, Longing
दीदार= Appearance, Sight, Seeing
ईमान= Belief, Conscience, Creed, Faith
मद-भरी= Full Of Intoxication, Ecstasy, Wantonness, Lust
ज़ुल्फ़= A Curling Lock (Of Hair)Hanging Over The Temple Or Ear, Tresses
जाँ= Life, Soul
बैर= Enmity, Hostility
बे-नक़ाब= Unveiled
जानाँ=  A Loved One, A Sweetheart, Dear
ग़ैर= Stranger, Outsider

शुक्रवार, 30 जून 2017

ख़ानाबदोशियां!!!

मुद्दतों तलक बेवजह दश्त-ओ-बियाबान भटके,
तेरे फ़ितूर से बचने को हम सारा जहान भटके !

यूँ तो हैं दिल को मेरे रंजिशें तुझसे हज़ार,
लेकिन पर्देदारियों की ख़ातिर बेज़ुबान भटके !

तेरे अक्स तलाशने चले थे तेरी मुंडेरों के साए में,
धूप छाँव के एक खेल में हम सुबह शाम भटके !

सोचा था मयक़शी से भर जायेंगे कुछ तो ज़ख्म,
लेकिन तेरी जलन में तिश्ना साक़ी-ओ-जाम भटके !

इतने भी नहीं तन्हा अभी ख़ानाबदोशियों से “फ़राज़”,
मेरी गर्दिशों में साथ मेरे भी कुछ महेरबान भटके !!!

|||फ़राज़|||

मुद्दत=for a long time
रंजिश=ill-will, hostility
तिश्ना=thirsty, insatiable, eagerly
साक़ी-ओ-जाम= bartender or cup-bearer and goblet.
दश्त-ओ-बियाबान= forest and deserts 
ख़ानाबदोशियाँ=nomadicity
गर्दिश= misfortune